समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के आगे अफसर इस कदर नतमस्तक हैं कि उनके लिए नियम विरुद्ध निर्माण तो क्या कानून भी तोड़ सकते हैं। पहले उनके उनके बेटे की सगाई में सीएम के आने की बात इस तरह फैलाई गई कि बरेली का सारा अमला उनके घर मुहल्ले को सजाने में जुट गया। सीएम सगाई में नहीं आए तो फिर शादी में आने की बात कही गई और पीलीभीत बाईपास का डिवाइडर तक सर्फ से धुला गया। बेटे की शादी तय होने के बाद नगर निगम तो सेवा में जुट गया। उनके मुहल्ले के बाहर बने लोहिया द्वार के जीर्णोद्धार के नाम पर उसे ऊंचा और रंगीन बनाया गया। लोहिया द्वार लिखने के बाद एक कोने से दूसरे उनका नाम और पदनाम लिखा गया। लेटर हेड की तरह नाम के नीचे एक तरफ पूर्व सांसद दूसरी तरफ राज्यसभा तो लिखा है बगल में एक तरफ मेयर आईएस तोमर और दूसरी तरफ नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव का नाम भी अंकित कर दिया। सबसे दिलचस्प ये कि गेट में सबसे ऊपर अशोक की लाट लगा दी गई है। इस संप्रतीक चिह्न का इस तरह प्रयोग दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद इसे लगाने वाला नगर निगम और बरेली का प्रशासन ही नहीं यहां के राजनेता भी चुप्पी साधे बैठे रहे। जब इस बारे में अफसरों से पूछा तो सब पल्ला झाडते नजर आ रहे हैं हां वीरपाल जरूर कह रहे हैं कि बतौर पूर्व सांसद वह ऐसा कर सकते हैं। वैसे सच ये है कि पूर्व सांसदों को भी इसकी इजाजत नहीं है और इस तरह मुहल्ले के गेट पर तो कतई नहीं।
इतनी ही नहीं जिलाध्यक्ष का रुतबा दिखाने के लिए इस गेट के आगे हाइवे पर अतिक्रमण कर गुंबदनुमा रोटरी भी बना दी है। ये किसने बनाया कितना खर्च किया अतिक्रमण जायज है क्या? इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं । और हां मेन सड़क से वीरपाल सिंह की कोठी के द्वार तक इंटरलाकिंग की सड़क भी नगर निगष् ने ही बनायी है। इसका खर्चा दस लाख बताया जा रहा है। ये सारे खर्च किस मद से निकाले गए हैं ये भी कोई नहीं बताता।
अब किसी को नहीं पता!
‘अशोक की लाट नगर निगम से नहीं लगी। जिसने लगवाई हो, वह जाने। मुझे इसकी बहुत ज्यादा जानकारी भी नहीं है।’
- डा. आईएस तोमर, मेयर
वहां बनाए गए लोहिया द्वार पर मेयर और पूर्व सांसद का नाम जरूर लगवाया गया था लेकिन अशोक स्तंभ का चिह्न वहां लगाए जाने की बात मेरे संज्ञान में नहीं है। उसे देखने के बाद ही कुछ कहना उचित होगा।
- शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त, बरेली।
‘नगर निगम ने लोहिया गेट बनाया था। हाल ही में उसकी रंगाई पुताई कराई गई। सड़क भी बनाई गई है। अशोक की लाट हमने नहीं लगवाई।’
- सतीश कुमार, एक्सईएन नगर निगम
वीरपाल बोले-
‘पार्क या गेट पर अशोक की लाट लगवाने पर प्रतिबंध नहीं है। सांसद भी प्रोटोकाल में अशोक की लाट लगवाने के अधिकारी हैं। किसी वाहन पर अशोक की लाट लगवाने पर प्रतिबंध है।’