नेताओं की मेहरबानी से मंडल के कई दरोगा तबादला होने के कई महीने बाद भी मलाईदर थानों में जमे हुए हैं। इनमें से नौ ऐसे हैं जिनके पास थानों के चार्ज हैं। पीलीभीत में तीन, शाहजहांपुर और बरेली में एक-एक और बदायूं में चार दरोगा तबादला होने के बाद अपने नेता की पसंद के थाने के एसओ बने हुए हैं। उन्हें जैसे ही रिलीव करने की सुगबुगाहट होती है, तो वह अपने नेताओं से फोन करा देते हैं।
पीलीभीत के दरोगा तापेश्वर सागर का तबादला फैजाबाद हो चुका है, लेकिन वह अब भी बीसलपुर कोतवाली में जमे हैं। धनन्जय सिंह शाहजहांपुर नहीं गए जहानाबाद में ही हैं। मेहर सिंह, अनिल कुमार सिंह, ललिता मेहता और सतेंद्र कुमार सिंह को बरेली आना है, लेकिन सब अपनी इच्छा से पीलीभीत में नौकरी कर रहे हैं। लाल सिंह राणा का तबादला शाहजहांपुर हो चुका है, लेकिन वह पीलीभीत की सबसे महत्वपूर्ण पूरनपुर कोतवाली में तैनात हैं। शाहजहांपुर में भी थानों में एसओ की तैनाती को लेकर खूब नेतागीरी हो रही है। नरेंद्र सिंह यादव का तबादला बदायूं हो चुका है, वह मलाईदार पुवांया कोतवाली में जमे हैं। राजेश कुमार कश्यप बदायूं जाने के बजाए जलालाबाद में बने हुए हैं। इसी तरह इशहाक हुसैन का बरेली तबादला हो चुका है, लेकिन वह तिलहर में जमे हुए हैं। दरोगा रविंद्र कुमार बदायूं जाने के बजाए शाहजहांपुर की सदरबाजार कोतवाली में हैं। शाहजहांपुर में कुल सोलह दरोगा ऐसे हैं, जो वहां से आना ही नहीं चाहते हैं। बदायूं में ग्यारह दरोगा ऐसे हैं जो कहीं जाना ही नहीं चाहते हैं। राजकुमार भारद्वाज का पीलीभीत तबादला हो गया है लेकिन वह शाहजहांपुर में यातायात निरीक्षक की भूमिका में बने हुए हैं। सतीश चंद्र को बरेली आना चाहिए, लेकिन वह बिसौली में ही हैं। कानपुर जोन तबादला होने के बाद भी सुनीता मिश्रा महिला थाने की एसओ बनी हुई हैं। बरेली में विद्याराम दिवाकर को हाल ही में एसएसपी ने नई तैनाती पर भेजा। देवरनिया थाने के एसओ रामवीर सिंह यादव पीलीभीत तबादला होने के बाद भी वह यहीं जमे हुए हैं। आईजी विजय सिंह मीना से जब ये प्रकरण बताए गए तो उन्होंने बताया कि ऐसे दरोगाओं की सूची बनाकर रिलीव कराया जाएगा।