बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-नौ अविनाश कुमार सिंह ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-चार (अवर न्यायालय) के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें भुता थाना क्षेत्र के गांव पटना निवासी प्रेमवती के परिवाद को फौजदारी का मामला न मानते हुए दो सितंबर 2025 के लिए निरस्त कर दिया गया था। अपर सत्र न्यायालय ने दो फरवरी को दिए आदेश में कहा है कि अवर न्यायालय का यह दायित्व था कि वह उचित आदेश पारित करता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
कोर्ट ने कहा कि परिवादिनी व गवाहों के बयानों में एकरूपता के बाद भी अवर न्यायालय ने विधिसम्मत आदेश पारित नहीं किया। ऐसे में अवर न्यायालय के दो सितंबर 2025 के आदेश को निरस्त किया जाता है और आदेशित किया जाता है कि 25 फरवरी को मामले में पक्षकारों को तलब कर सुनवाई की जाए।
दरअसल, प्रेमवती ने गांव के ही कृपाल, पोशाकी, रामेश्वर दयाल, धर्मपाल, कुंदन, वेदपाल, चतुरी और भगवानदास पर मारपीट, गाली-गलौज, पेड़ों को काटने से रोकने और कटे हुए कटे पेड़ की लकड़ी चोरी करने का आरोप लगाते हुए परिवाद दाखिल किया था।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-चार ने इसे सिविल प्रवृत्ति का परिवाद मानते हुए खारिज कर दिया था। इस आदेश के विरोध में प्रेमवती ने अपर सत्र न्यायालय की शरण ली। अपर सत्र न्यायालय के अवर न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए आरोपियों को तलब करने का आदेश दिया है। संवाद