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Bareilly News: ऑनलाइन गेम और रील का नशा, स्मार्टफोन छीनने पर हिंसक हो रहे लाडले

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स्मार्टफोन की जरूरत से ज्यादा लत बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य खराब कर रही है। छह से दस घंटे तक पहुंच रहा स्क्रीन टाइम नेत्र विकार भी पैदा कर रहा है। फिलहाल, स्मार्टफोन छीनने पर किशोरों का हिंसक होना अभिभावकों के समक्ष बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। ऐसे मामले अब पुलिस तक भी पहुंचने लगे हैं, जिनमें अभिभावक कानूनी दखल चाहते हैं।
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ऑनलाइन गेम में रकम गंवाई, मां पर किया चाकू से हमला

तुलाशेरपुर निवासी महिला ने कुछ दिन पहले इज्जतनगर थाने में शिकायत कर बताया था कि उसके बेटे को ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई है। उसने कई लोगों से कर्ज ले रखा है। समझाने पर वह गालियां देता है। मोबाइल फोन छीनने पर उसने सब्जी काटने वाले चाकू से उन पर हमला कर दिया। शिकायत पर पुलिस ने महिला के बेटे को मुचलका पाबंद कर और चेतावनी देकर छोड़ दिया। वह मोबाइल फोन छीनने पर खुद की जान देने या फिर किसी की जान लेने की धमकी देने लगा। उसकी मन कक्ष में काउंसलिंग कराई गई।
सीढि़यों से उतरते व स्कूटी चलाते देख रहे रील, हो रहे हादसे
जिला अस्पताल के मन कक्ष में ऐसे भी कई अभिभावक आ रहे हैं, जिनके लाडले सीढ़ी चढ़ते या उतरते वक्त और स्कूटी चलाते वक्त भी रील देख रहे हैं। ड्राइविंग के वक्त रील देखने की वजह से हादसे होने के मामले में आ रहे हैं। उनको मोबाइल फोन से पर्याप्त दूरी रखने की सलाह दी जा रही है। जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग व नेत्र रोग विभाग में भी रील देखने के साइड इफेक्ट से जुड़े मामले पहुंच रहे हैं।
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हिंसक वीडियो देखने और गेम खेलने पर टोकें
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कई अभिभावकों को पता भी नहीं चलता कि उनके लाडले ने उनके मोबाइल पर कई एक्सेस देकर मामूली लोन ले लिया है। जब साइबर ठगों की ओर से उन्हें रुपये देने के लिए धमकाया जाता है या उनके निजी फोटो-वीडियो वायरल किए जाते हैं तो साइबर टीम की जांच में बच्चों का कारनामा सामने आता है। कई बच्चे गेम की खातिर परिचितों से भी कर्ज ले लेते हैं। इसलिए बच्चों को फोन देने के साथ ही उनकी डिजिटल निगरानी जरूर करें। हिंसक वीडियो देखने और गेम खेलने पर जरूर टोकें। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
शुरुआत से ही रखें नियंत्रण
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परीक्षाओं से पहले ऐसे कई मामले हमारे पास आए कि रील और गेम की दुनिया में खोए किशोर परीक्षा के दबाव को नहीं झेल पाए। वह मोबाइल फोन से दूरी बर्दाश्त नहीं कर सके। वे या तो अवसाद में जाते या हिंसक होते दिखे। अभिभावक उन्हें लेकर परेशान तो हैं, पर वह कितनी देर मोबाइल फोन पर लाइव रहता है या क्या देख रहा है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से वे अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं। शारीरिक खेलों के प्रति रूचि खत्म होने से बच्चों का विकास भी नहीं हो पा रहा है। - डॉ. आशीष कुमार, मनोचिकित्सक
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ये बरतें सावधानी
- बाहरी खेलों को बढ़ावा दें।

- बच्चों के सामने खुद भी फोन का इस्तेमाल कम करें।

- बच्चों को पेंटिंग, संगीत व अन्य रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें।

- स्मार्टफोन की लत धीरे-धीरे छुड़ाएं, बच्चों को अखबार व किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

- बच्चों के मामले में स्क्रीन टाइम 40 मिनट तक सीमित करें।
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