अवैध होर्डिंग के खिलाफ नगर निगम का अभियान बेदम साबित हो रहा है। शहर की मुख्य सड़कों और चौराहों पर अवैध होर्डिंग की भरमार है, जबकि निगम की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सिमटी हुई है। ये अवैध होर्डिंग न केवल शहर की सुंदरता बिगाड़ रहे हैं, बल्कि आंधी-बारिश में ये राहगीरों व शहरवासियों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसके बावजूद नगर निगम का अमला बेपरवाह नजर आ रहा है।
नगर निगम ने अप्रैल में कार्रवाई का दिखावा करते हुए नौ विज्ञापन एजेंसियों को नोटिस जारी किए थे। दावा किया गया था कि अवैध होर्डिंग को तत्काल हटाया जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। नोटिस की मियाद बीतने के बावजूद रामपुर गार्डन, सिविल लाइंस, चौपुला रोड और चौकी चौराहा समेत शहर के सभी प्रमुख इलाकों में अवैध होर्डिंग की भरमार है। कई स्थानों पर तो होर्डिंग आधे टूटकर लटक रहे हैं जो तेज हवा चलने पर किसी राहगीर या वाहन के ऊपर गिर सकते हैं।
घनी आबादी और व्यस्ततम ट्रैफिक वाले इलाकों में भी अवैध होर्डिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नोटिस जारी करने के बाद निगम की टीम धरातल पर कार्रवाई करना भूल गई है। मानसून की दस्तक से पहले यदि इन जर्जर और अवैध होर्डिंग को हटाया नहीं गया तो आंधी-तूफान के दौरान ये बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।
- सेटेलाइट बस अड्डे पर तमाम कंपनियों के होर्डिंग लगे हुए हैं। इनमें से कई अवैध हैं। पास में ही सेना का इलाका होने के कारण इस पर आपत्ति भी हुई थी। तब निगम ने अभियान चलाकर उन्हें हटवाया था, लेकिन अब फिर होर्डिंग लग गए हैं। सेटेलाइट से पीलीभीत रोड पर कई ऐसे होर्डिंग भी मिल जाएंगे जो टूटकर लटके हुए हैं।
- चौकी चौराहे पर भी कई रूफटॉप बिल्कुल जर्जर हाल में हैं। कुछ एजेंसियों को अप्रैल में नोटिस जारी किए गए थे, पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। चौकी चौराहे से सर्किट हाउस चौराहे तक यही हाल है। यहां वनमंत्री, मंडालयुक्त, एसएसपी, सीडीओ के आवास हैं। इसके बावजूद निगम की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सुरक्षा उपकरणों के बिना ही बदले रहे पोस्टर
शाहजहांपुर रोड पर बुधवार को एक साइट पर मजदूर सुरक्षा उपकरणों के बिना ही पोस्टर बदलता दिखा। 20 फुट से अधिक ऊंचाई पर चढ़ने के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। अगर जरा की चूक हो जाए तो 20 फीट ऊंचाई से सीधे नीचे गिर पड़ेगे।
रूफटॉप लगाने में ऐसे होता है खेल
रूफटॉप लगाने वाली एजेंसियां नियमों को ताक पर रखकर निगम को भी गुमराह कर रही हैं और लाखाें रुपये का चूना लगा रही हैं। जानकारों ने बताया कि एजेंसियां अधूरे भवनों के नक्शों के आधार पर अनुमति ले लेती हैं। कई मामलों में छत की वास्तविक क्षमता, ऊंचाई और उपयोग की सही जानकारी नगर निगम को नहीं दी जाती। फाइलों में सब कुछ नियमों के मुताबिक दिखाया जाता है, लेकिन मौके पर हालात बिल्कुल अलग होते हैं। परमिशन फीस, निरीक्षण शुल्क और अन्य टैक्स की चोरी से निगम को करोड़ों रुपये की क्षति हो रही है। नियमों के अनुसार जहां सीमित भार और तय क्षेत्र में ही रूफटॉप लगाया जाना चाहिए, वहां एक ही छत पर कई इंस्टॉलेशन कर दिए जाते हैं। फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी के नियमों की अनदेखी आम बात है। इससे न केवल इमारतों की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
वर्जन
अवैध होर्डिंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। बीते माह भी नौ एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए थे। जहां अनियमितता है, वहां कार्रवाई की जाएगी। - राजीव राठी, एक्सईएन