बरेली। कोरोना नियंत्रण की मुहिम में बतौर जिला सर्विलांस अधिकारी काम कर रहे एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम के नोएडा ट्रांसफर के बाद काफी लंबा घटनाक्रम तेजी के साथ घट गया। शुक्रवार को अचानक यह पता लगने के बाद कि वह खुद संक्रमित हो गए हैं, एक के बाद सवाल खड़े होते गए। बरेली के बजाय मुरादाबाद में जांच कराने पर सवाल खड़ा हुआ तो एसीएमओ ने दावा किया कि बरेली में ट्रूनॉट जांच की किट खत्म हो गई थीं लेकिन खुद सीएमएस ने उनका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद सीएमओ ने भी यह कहकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया कि एसीएमओ की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। शनिवार को पोर्टल देखने के बाद ही उन्हें पता लगा कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
दरअसल शासन ने दो दिन पहले ही एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम का प्रशासनिक आधार पर बरेली से गौतमबुद्ध नगर तबादला कर दिया था, साथ ही उन्हें जल्द वहां ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि इसके बाद उनकी तबियत खराब होने की खबर फैली लेकिन फिर भी वह मुरादाबाद चले गए। मुरादाबाद के जिला अस्पताल में उन्होंने ट्रू-नेट मशीन से जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सवाल तब खड़े होने शुरू हुए जब सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने एसीएमओ के बरेली में जांच न कराने के सवाल पर पल्ला झाड़ लिया। इसी सवाल के जवाब में एसीएमओ डॉ. गौतम ने दावा किया कि बरेली में ट्रूनॉट जांच के लिए इस्तेमाल की जाने वाली किट खत्म हो गई थी, इसलिए उन्हें मुरादाबाद जाना पड़ा जहां रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बरेली लौटे हैं लेकिन उनके इस दावे को सीएमएस ने खारिज कर दिया।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि जिला अस्पताल में जांच किट खत्म नहीं हुई हैं। ट्र्ूनॉट मशीन से रोजाना संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है और इसकी सूचना भी लगातार पोर्टल पर अपलोड हो रही है।
आईवीआरआई से तमाम लोगों की रिपोर्ट
घंटों में मंगा ली, खुद जांच नहीं कराई
कोविड के नोडल और जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने पिछले दिनों में कई अफसरों के सैंपल आईवीआरआई की लैब में भेजकर उनकी रिपोर्ट चंद घंटों में मंगा ली थी लिहाजा अब यह भी पूछा जा रहा है कि अगर जिला अस्पताल की ट्रूनॉट मशीन से जांच कराने में वाकई कोई दिक्कत थी तो उन्होंने खुद अपना सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई क्यों नहीं भिजवाया। सीएमओ को अपनी तबीयत खराब होने और फिर जांच के लिए मुरादाबाद चले जाने की कोई सूचना न दिए जाने के पहलू को भी असमंजस से देखा जा रहा है।
.. और अब यहां सैंपल दिया तो लीक
होने की वजह से नहीं हो सकी जांच
डॉ. गौतम शुक्रवार को फिर बरेली लौटकर अपने कार्यालय स्टाफ के साथ तीन सौ बेड के अस्पताल में सैंपल कराने पहुंचे। सभी के सैंपल लेकर बॉक्स पैक कर दिया गया। अचानक रात ढाई बजे उनका सैंपल लीक होने की सूचना पर उसे बॉक्स से हटा दिया गया। बाकी सैंपल सुबह जांच के लिए आईवीआरआई भेज दिए गए। एसीएमओ का सैंपल जांच को न भेजने से हड़कंप मच गया। उनका दोबारा सैंपल लिया गया। अस्पताल इंचार्ज डॉ. अजमेर सिंह के मुताबिक, सैंपल लीक हो रहा था, इसलिए उसे बॉक्स से हटा दिया गया। दोबारा सैंपल ले लिया गया है, उसे जांच को भेजा जाएगा।
वर्जन:
एसीएमओ ने बरेली में जांच नहीं कराई। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, यह शनिवार को पोर्टल पर देखने के बाद पता चला। उन्हें कोविड एल-3 अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सैंपल लीक होने पर दोबारा सैंपल लिया गया है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
बतौर नोडल अफसर कई मामलों में
लापरवाही पर हुआ था ट्रांसफर
पिछले दिनों एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम की ओर से कोरोना संक्रमितों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में हीलाहवाली की गई थी। इसके अलावा कोविड अस्पताल में जरूरी व्यवस्था के मामले में भी उन पर आरोप लगे। निजी अस्पतालों में इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल लागू कराने में भी उन पर तमाम आरोप लगे थे। इनमें एक मामला जनकपुरी के एक अस्पताल में कोविड नियमों को दरकिनार कर इलाज करने के मामले में पीड़ित और अस्पताल संचालक के बीच समझौता कराने का भी था। इसकी शिकायत सीएम कार्यालय में भी हुई। हाल ही में एक कोरोना पीड़ित के अंतिम संस्कार के बाद भी उसका शव मोर्चरी में होने की गलत बयान देने का मामला सुर्खियां बनने के बाद शासन ने संज्ञान लिया।