बरेली। शोधार्थी ने पीएचडी कोर्स वर्क का परिणाम अपडेट करने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। कहा कि ऑनलाइन आवेदन करने पर भी रुपये लिए गए। इसके बाद भी उसका काम नहीं किया गया।
शोधार्थी अनुपम कुमार ने बताया कि ऑनलाइन फॉर्म जमा करने के बावजूद, तीन सप्ताह तक कोई प्रगति नहीं हुई तो उसने प्रशासनिक ब्लॉक में कमरा नंबर एक, तीन और 98 में बैठने वालों से संपर्क किया। इन लोगों ने 15-20 दिनों तक उसे बेवजह दौड़ाया। इसके बाद रिश्वत मांगी गई। रुपये लेने के बाद भी काम नहीं किया गया।
शोधार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की है। आरोप लगाया कि सिंगल विंडो प्रणाली पूरी तरह विफल है। विद्यार्थियों को एक ही काम के लिए कई कार्यालयों में दौड़ना पड़ता है। मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की। मामले में विवि का पक्ष जानने के लिए परीक्षा नियंत्रक और मीडिया प्रभारी से संपर्क किया गया मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। संवाद