कोर्ट से सरकारी कर्मचारी ही ले जाते हैं कागजात
किसी भी आरोपी की जमानत में लगाए गए जमानतदारों के पते सत्यापित करने के लिए प्रपत्र थाने भेजे जाते हैं। हैसियत सत्यापित करने के लिए भी प्रपत्र तहसील आदि संबंधित विभागों को भेजे जाते हैं। थाने के पैरोकार यह प्रपत्र न्यायालय से लाते हैं जबकि हैसियत वाले प्रपत्र न्यायालय से तहसील या परिवहन विभाग आदि के कर्मचारी लेकर आते हैं। सत्यापन के बाद यही लोग न्यायालय में इन प्रपत्रों को दाखिल करते हैं। ऐसे में पूरी तरह फर्जी आख्या न्यायालय में कैसे दाखिल कर दी गई? पुलिस को विवेचना में स्थिति साफ करनी होगी।
जिन दरोगा-लेखपाल ने किया सत्यापित, उनका रिकॉर्ड नहीं
कुंजी के पते की सत्यापन आख्या पर दरोगा वीरेंद्र पाल सिंह के हस्ताक्षर हैं। सीबीगंज थाना पुलिस के मुताबिक इस नाम का दरोगा थाने में कभी तैनात ही नहीं रहा। वहीं हैसियत सत्यापन में हस्ताक्षर करने वाले लेखपाल गोपाल प्रसाद और राजस्व निरीक्षक अवधेश कुमार भी कभी तहसील में कार्यरत ही नहीं थे। माना जा रहा है किसी शातिर ने फर्जी व कूटरचित आख्या तैयार कर न्यायालय में लगा दी।
पार्षद हत्याकांड के आरोपी की भी ऐसे ही कराई थी जमानत
जिले में फर्जी कागजातों से जमानत कराने का यह पहला मामला नहीं है। ऐसे ही शातिरों ने एक साल पहले हुए शहर के सभासद भूपेंद्र सिंह राठौर हत्याकांड के एक आरोपी की फर्जी आधार कार्ड लगाकर जमानत करा दी थी। जानकारी होने पर जमानतदार किसान ने आरोपियों के विरुद्ध पिछले दिनों कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस मामले में भी छानबीन कर रही है।
सीओ प्रथम पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि यह गंभीर मामला है। इसमें कोर्ट के आदेशानुसार रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पुलिस विवेचना में स्पष्ट करेगी कि किस तरह यह फर्जीवाड़ा किया गया। जो भी आरोपी मिलेंगे, उनकी गिरफ्तारी कर जेल भेजा जाएगा।