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UP News: बरेली में फर्जी जमानतदारों का रैकेट सक्रिय, ट्रायल के दौरान आरोपी हुआ फरार, तब हुआ बड़ा खुलासा

Mon, 10 Feb 2025 10:53 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में ट्रायल के दौरान जब आरोपी कोर्ट में नहीं आया तो उसके जमानतदारों को नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोपी की जमानत लेने से इन्कार कर दिया। तब सत्यापन में मामले का खुलासा हुआ। 
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Crime demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली जिले में फर्जी जमानतदारों का रैकेट सक्रिय है। इसका खुलासा न्यायालय में विचारण (ट्रायल) के दौरान गोकशी का आरोपी फरार होने पर हुआ है। कोर्ट ने जमानतदारों को नोटिस भेजा तो उन्होंने इस आरोपी की जमानत लेने से इन्कार कर दिया। जिन लेखपाल, कानूनगो व दरोगा की जांच रिपोर्ट लगी थी, उनका संबंधित विभागों में रिकॉर्ड ही नहीं मिला। सच्चाई सामने आने पर कोर्ट रीडर ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या आठ के रीडर अरविंद गौतम ने जनपद न्यायाधीश के आदेश पर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। न्यायालय में अपराध संख्या 499/2023 राज्य बनाम कुंजी का केस चल रहा है। गोकशी के आरोपी कुंजी के जमानतदारों की हैसियत व पते का सत्यापन कराने के लिए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या तीन ने चार मई 2024 को सीबीगंज थाने और सदर तहसील में प्रपत्र भेजे थे। सत्यापन के बाद जमानत प्रपत्र कोर्ट के लिपिक विजय कुमार ने प्रस्तुत किए जिन्हें न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। 

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केस के विचारण के दौरान जब आरोपी कुंजी कोर्ट में नहीं आया तो उसके जमानतदारों को नोटिस भेजा गया। मथुरापुर निवासी जमानतदारों सगीर अहमद और शकील अहमद ने कोर्ट में उपस्थित होकर शपथपत्र दिया कि उन लोगों ने कुंजी की जमानत ही नहीं ली थी। न्यायालय ने जमानतदारों की सत्यापन आख्या की जांच की तो वह फर्जी निकली। इसके बाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

कोर्ट से सरकारी कर्मचारी ही ले जाते हैं कागजात 
किसी भी आरोपी की जमानत में लगाए गए जमानतदारों के पते सत्यापित करने के लिए प्रपत्र थाने भेजे जाते हैं। हैसियत सत्यापित करने के लिए भी प्रपत्र तहसील आदि संबंधित विभागों को भेजे जाते हैं। थाने के पैरोकार यह प्रपत्र न्यायालय से लाते हैं जबकि हैसियत वाले प्रपत्र न्यायालय से तहसील या परिवहन विभाग आदि के कर्मचारी लेकर आते हैं। सत्यापन के बाद यही लोग न्यायालय में इन प्रपत्रों को दाखिल करते हैं। ऐसे में पूरी तरह फर्जी आख्या न्यायालय में कैसे दाखिल कर दी गई? पुलिस को विवेचना में स्थिति साफ करनी होगी।

जिन दरोगा-लेखपाल ने किया सत्यापित, उनका रिकॉर्ड नहीं  
कुंजी के पते की सत्यापन आख्या पर दरोगा वीरेंद्र पाल सिंह के हस्ताक्षर हैं। सीबीगंज थाना पुलिस के मुताबिक इस नाम का दरोगा थाने में कभी तैनात ही नहीं रहा। वहीं हैसियत सत्यापन में हस्ताक्षर करने वाले लेखपाल गोपाल प्रसाद और राजस्व निरीक्षक अवधेश कुमार भी कभी तहसील में कार्यरत ही नहीं थे। माना जा रहा है किसी शातिर ने फर्जी व कूटरचित आख्या तैयार कर न्यायालय में लगा दी। 
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पार्षद हत्याकांड के आरोपी की भी ऐसे ही कराई थी जमानत
जिले में फर्जी कागजातों से जमानत कराने का यह पहला मामला नहीं है। ऐसे ही शातिरों ने एक साल पहले हुए शहर के सभासद भूपेंद्र सिंह राठौर हत्याकांड के एक आरोपी की फर्जी आधार कार्ड लगाकर जमानत करा दी थी। जानकारी होने पर जमानतदार किसान ने आरोपियों के विरुद्ध पिछले दिनों कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस मामले में भी छानबीन कर रही है।

सीओ प्रथम पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि यह गंभीर मामला है। इसमें कोर्ट के आदेशानुसार रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पुलिस विवेचना में स्पष्ट करेगी कि किस तरह यह फर्जीवाड़ा किया गया। जो भी आरोपी मिलेंगे, उनकी गिरफ्तारी कर जेल भेजा जाएगा।
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