बरेली। फर्जीवाड़ा करने में व्यस्त बैंककर्मियों ने दस्तावेजों की जांच करना भी जरूरी नहीं समझा और कृषि ऋण का नवीनीकरण करके खाते में लेनदेन कर दिया।
रिपोर्ट दर्ज कराने वाले नितिन का कहना है कि बाबा विक्रम प्रसाद की मौत आठ सितंबर 2017 को हो गई थी। इसके बाद जनवरी 2020 तक सारी जमीन की विरासत उनके पिता मनोज शर्मा और चाचा के नाम दर्ज हो गई। मगर बैंक स्टाफ ने दस्तावेजों की जांच किए बिना पुराने कागजात पर ही ऋण खाते का नवीनीकरण कर दिया। साथ ही धोखाधड़ी करके बैंक रिकॉर्ड में मौजूद उनके अंगूठे के निशान और दूसरे दस्तावेजों का भी प्रयोग किया। उनका कहना है कि बैंक की इस गड़बड़ी के चलते अब बाबा के ऋण खाते में 2.69 लाख रुपये बकाया दिख रहे हैं।
महिला के बचत खाते से भी गायब हो चुके 1.13 लाख
बिशारतगंज के गांव अतरछेड़ी निवासी सुधा देवी ने फरवरी 2020 में सेंट्रल बैंक की स्थानीय शाखा के मैनेजर और कैशियर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुधा का कहना था कि उनके खाते से एक लाख 13 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। मगर जब वह इसकी जानकारी लेने बैंक पहुंचीं तो उनके साथ अभद्रता की गई और धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। इस मामले की शिकायत समाधान दिवस में होने के बाद डीएम ने सीडीओ से जांच कराई थी। उसके बाद एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी।