बरेली। पीलीभीत बाईपास पर शनिवार देर रात अंधेरे के चलते बाइक डिवाइडर से टकराने से दो छात्रों की मौत से उनके परिजन टूट गए हैं। रविवार को शवों का पोस्टमार्टम हाउस पर दोनों परिवारों ने बाईपास पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था न होने पर कसक जाहिर की। बोले- उनके बच्चे तो जान से गए, औरों की सुरक्षा के लिए अब तो प्रशासन को यहां रोशनी का प्रबंध करा ही देना चाहिए। परिजनों ने एंबुलेंस की लेटलतीफी पर भी गुस्सा जाहिर किया। बोले- एंबुलेंस समय पर आ जाती तो जान बच भी सकती थी।
पीलीभीत बाईपास पर स्पलेंडर बाइक डिवाइडर में टकराने से दो छात्रों संजय नगर के गोपाल नगर निवासी सौरभ उर्फ गौरव और उसके पड़ोसी राहुल उर्फ शानू की मौत हो गई थी। हादसे में सौरभ का चचेरा भाई अश्विनी गंभीर घायल हो गया। उसकी हालत अब भी गंभीर बताई जा रही है। रविवार दोपहर को शवों का पोस्टमार्टम हुआ तो कई हड्डियां टूटी मिलीं। यहां सौरभ के पिता सचिव योगेंद्र पाल गंगवार मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर को रिजर्वेशन तय था। सौरभ को कोलकाता जाकर होटल मैनेजमेंट के अपने जॉब की ट्रेनिंग में जाना था। रात साढ़े आठ बजे उनका भतीजा अश्विनी भी उन्हीं के घर था। उन्होंने खाना खाने को कहा तो दोनों यह कहकर चले गए कि अश्विनी की मां उनका खाना बना चुकी हैं, वह वहीं खाएंगे। शानू इन्हें कब मिल गया और दो घंटे बाद यह हादसा कैसे हो गया, उन्हें नहीं पता।
शानू के बड़े भाई मोनू ने कहा कि उनका भाई और उसका दोस्त सौरभ जान से चले गए पर आगे हादसों को रोकने के लिए बाईपास पर रोशनी का सही इंतजाम होना चाहिए। मोनू के साथ शानू के दोस्त भी थे। सभी ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि पौन घंटे तक मौके पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। घंटे भर बाद जब अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टर ने दोनों को गेट पर ही मृत घोषित कर दिया। टीस थी कि समय पर इलाज मिलता तो शायद एक या दोनों की जान बच जाती।
डीजे का काम करता था शानू
शनिवार रात शानू की पहचान सबसे बाद में हो सकी थी। भाई मोनू ने बताया कि उनके पिता राजकुमार की छह साल पहले मौत हो गई थी। चार भाई बहनों में शानू सबसे छोटा और सबका लाड़ला था। उनके साथ ही वह भी डीजे का काम करता था। रात में घर से निकला था। सौरभ से उसकी दोस्ती थी। पता नहीं कब वह उसके साथ चला गया।