बरेली। सऊदी अरब में बुधवार को जा मक्का से मदीना जा रहे जायरीन की बस और लोडर वाहन की भिडंत में जान गंवाने वाले बरेली के तीन युवकों के शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। तीनों शव बुरी तरह से जले हुए हैं। डीएनए जांच में शिनाख्त के बाद ही शव परिवार वालों को मिल सकेंगे। हादसे में जान गंवाने वाले सभी 35 लोग के शव निकात हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखे हैं।
कैंट थाने के गांव ठिरिया निजावत खां का नौशाद पुत्र गोली खां, उसका भतीजा आफताब पुत्र सफदर खां और भांजा उड़ला जागीर निवासी जीशान पुत्र अबरार सऊदी अरब में रहकर नौकरी करते थे। बुधवार को यह लोग मक्का से मदीना बस से अन्य जायरीन के साथ उमरा करने जा रहे थे। मदीना से करीब 170 किमी पहले सासको रोड पर मरकज-उल-अलख में जायरीन से भरी बस और लोडर की आमने-सामने भिड़ंत के बाद बस में आग लग गई थी। नौशाद, आफताब और जीशान समेत 35 से ज्यादा जायरीन की जलकर मौत हो गई। जिन शव की पहचान नहीं हो सकी है, उनको निकात हॉस्पिटल में रखा गया है। सऊदी अरब के रियाद में रहने वाले आफताब के भाई जिलानी और रिश्तेदार रेहान तीनों के शव की पहचान करने निकात हॉस्पिटल पहुंचे। बुरी तरह से जल चुके शवों की वे पहचान नहीं कर सके। सऊदी सरकार ने इन शवों की डीएनए जांच कराने की बात कही है। इसके बाद ही बरेली के तीनों शवों की पहचान हो सकेगी। ऐसे में शव परिवार वालों को मिलने में अभी देरी हो सकती है। बरेली हज सेवा समिति के अध्यक्ष पम्मी वारिसी ने बताया कि बरेली से रविवार को समिति की एक और टीम सऊदी अरब रवाना होगी।