सामान्य मरीजों को मिल रही लंबी तारीख
फिलहाल, अस्पताल का पूरा बोझ दूसरी मशीन पर आ गया है। इसकी वास्तविक क्षमता एक दिन में महज 25-30 अल्ट्रासाउंड करने की है, लेकिन मरीजों के दबाव को देखते हुए तकनीशियन रोज 40-45 जांच कर रहे हैं। क्षमता से ज्यादा इस्तेमाल होने के कारण इसके भी खराब होने का अंदेशा है। अस्पताल प्रबंधन केवल इमरजेंसी वार्ड में आने वाले गंभीर मरीजों की ही जांचें कर पा रहा है, जबकि ओपीडी में आने वाले सामान्य मरीजों को लंबी तारीखें थमा दी जा रही हैं।
असलम के पेट में असहनीय दर्द, मिली तारीख
बिथरी चैनपुर के असलम ने बताया कि उनके पेट में पथरी है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा है, लेकिन यहां पर मशीन खराब है और तारीख दी जा रही है। इतने दिन कौन रुकेगा? इज्जतनगर के विपिन शर्मा ने कहा कि निजी लैब से कराएंगे भाई की जांच भाई के पेट में दर्द हो रहा है। उसका अल्ट्रासाउंड कराने आया था। यहां जो मरीज भर्ती हैं, उन्हीं की जांच हो रही है। अब निजी लैब से जांच करानी होगी।
ढीली करनी पड़ रही जेब
अस्पताल की इस बदइंतजामी की वजह से जो मरीज दो माह तक इंतजार नहीं कर सकते, वे निजी केंद्रों से जांच करवा रहे हैं। प्राइवेट सेंटरों पर एक अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 800 से 1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जिला अस्पताल में मुफ्त इलाज की आस लेकर आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ा बोझ सावित हो रहा है। कई मरीज तो ऐसे भी हैं जो जांच के लिए रसूखदारों से सिफारिश तक लगवा रहे हैं
एक्स-रे कक्ष के बाहर भी कतार
अल्ट्रासाउंड कक्ष के ठीक बगल में स्थित एक्स-रे कक्ष के बाहर भी सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लग रही है। कक्ष के बाहर मरीजों और तीमारदारों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां या बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इस गर्मी में घंटों कतार में खड़े-खड़े थककर लाचार मरीज और बुजुर्ग जमीन पर बैठ जाते हैं।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि अल्ट्रासाउंड की एक मशीन खराब है। जो मशीन ठीक है, उसी से काम लिया जा रहा है। खराब मशीन की मरम्मत के लिए पत्र लिखा गया है।