क्रेडाई के साथ दो दिन पहले हुई बीडीए अफसरों की बैठक में कई मुद्दों पर सहमति बनी है। 13 दिसंबर को लखनऊ में प्रमुख सचिव आवास एवं नियोजन के साथ होने वाली बीडीए अफसरोें की बैठक में कुछ और फैसले होने की उम्मीद है। इससे आम आदमी को नक्शा पास कराने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। अगर प्रमुख सचिव ने पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और लोकल एजेंसियों की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नक्शा पास करने को सहमति दे दी तो फिर किसी को भी नक्शा पास कराने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया के दफ्तर देहरादून नहीं दौड़ना पड़ेगा।
बरेली के तीन मसले ऐसे हैं जिनकी वजह से शहर का विकास थम गया है। बिल्डरों को ही नहीं आम आदमी को भी अपना घर बनवाना हो तो उसका नक्शा आसानी से पास नहीं हो पाता है। मजबूरी में शहर के एक बड़े बिल्डर ने अपने प्रोजेक्ट का नक्शा सर्वे ऑफ इंडिया की टीम को बुलाकर पास करा लिया है, लेकिन इसके लिए उन्हें तीन गुना फीस अदा करनी पड़ी है। इसके अलावा टीम को बुलाने को लिए ओर भी तमाम सेवाएं करनी पड़ी होंगी।
0-क्रेडाई की बैठक में बीडीए के अधिकारियों ने विकसित इलाकों में सब डिवीजन चार्ज न लेने पर विचार करने का आश्वासन दिया है। बिल्डरों से तो नए प्रोजेक्ट पर अब सब डिवीजन चार्ज लिया ही नहीं लिया जाएगा। बीडीए सब डिवीजन चार्ज भूमि मूल्य का एक फीसदी लेता था।
0-सैन्य इलाके की दीवार से दस मीटर के बाहर किसी से भी नक्शा पास कराने को एनओसी की बीडीए मांग नहीं करेगा। (त्रिशूल एयरबेस पर यह नियम लागू नहीं होगा) इसके लिए कैंट के अधिकारियों से बात करके रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा जाएगा। बता दें कि रक्षा मंत्रालय के उस आदेश में बरेली का नाम लिखे जाने से रह गया है, जिसमें दस मीटर के दायरे के बाहर नक्शा पास कराने को किसी एनओसी की जरूरत नहीं है। पत्र के बाद बरेली का नाम सैन्य क्षेत्रों की सूची में शामिल कराया जाएगा।
0-त्रिशूल एयरबेस से 4.2 किलोमीटर के दायरे में रक्षा मंत्रालय ने भवन बनाने वालों को नक्शा पास कराने के लिए एनओसी लेने की बाध्यता रखी है। एनओसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है, लेकिन सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून की एनओजी की भी इसमें जरूरत पड़ती है। वहां से एनओसी लेना टेड़ा काम है। क्रेडाई के अध्यक्ष रमनदीप सिंह ने इस प्रक्रिया को आसान करने के लिए लोकल एजेंसियों को इसकी जिम्मेदारी देने की मांग रखी है। उन्होंने महाराष्ट्र समेत कई प्रदेशों का हवाला भी दिया है। वहां यही व्यवस्था लागू भी है। बीडीए उपाध्यक्ष ने उन्हें इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
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त्रिशूल एयरबेस से 4.2 किलोमीटर दूरी के अंदर भवन बनवाने के लिए शहर के काफी हिस्से को राहत को मिली है। इस बीच नक्शे पास भी हुए हैं। लंबित नक्शों के आवेदनों पर विचार किया जा रहा है। शहर के सभी इलाकों में भवन बनवाने वालों के लिए नक्शा पास कराने वालों को और राहत दिलाने की कोशिश की जा रही है। 13 दिसंबर को प्रमुख सचिव आवास एवं नियोजन के सामने हम बरेली से मसलों को रखकर उनका हल निकलवाने की कोशिश करेंगे। - सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष, बीडीए
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बीडीए के अफसरों के सामने शहर के विकास को लेकर कई मसले रखे हैं। कुछ मसलों पर जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। नक्शा पास होने की शर्ते आसान होने से शहर का विकास तेजी होगा। नए प्रोजेक्ट पर सब डिवीजन चार्ज किसी बिल्डर से नहीं लिया जाएगा। हमारी मांग है कि विकसित इलाकों में आम आदमी से भी सब डिवीजन चार्ज न लिया जाए। इसके लिए हमारी लड़ाई जारी है। - रमनदीप सिंह, अध्यक्ष, क्रेडाई