बरेली। शहर में दो दिनों की बारिश ने अनियमित कॉलोनियों की पोल खोलकर रख दी। यहां पर भारी बारिश से ऐसा जलभराव हुआ कि उसको निकालने में नगर निगम के अधिकारियों के पसीने छूट गए। लोगों का पूरा आक्रोश नगर निगम को झेलना पड़ा। बगैर बीडीए के पूर्णता प्रमाणपत्र के पुरानी व नई कॉलोनियों विकसित की जा रही है। बीडीए का दावा है कि महज 10 कॉलोनियों को ही पूर्णता का प्रमाण दिया गया।
बारिश में दो दिनों तक जहां जलभराव हुआ ऐसी कॉलोनियों में रेजीडेंसी गार्डेन में छह फुट तक पानी भरा रहा। वजह कि यहां पर बिल्डर की तरफ से जलनिकासी की बेहतर सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। जिससे लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर गया। इस कारण उनका टीवी, फ्रिज, एसी, बेड, अलमारी, खाद्य सामग्री सब खराब हो गया। लोगों को ट्रैक्टर पर बैठकर कॉलोनी से बाहर निकाला गया, लोग होटलों में शिफ्ट हुए। आरोप है कि यहां पर पहले तालाब हुआ करता था, जिसको पाटकर कॉलोनी बसा दी गई। यहां पर करीब 100 से 150 घर होंगे। जिसमें 200 से अधिक परिवार रह रहे होंगे। यहां तो दूसरे दिन भी जलनिकासी के लिए जलनिगम लगा रहा। रेजीडेंसी कॉलोनी निवासी दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि दो दिनों से वह ठीक ढंग से सोए नहीं है। लोगों का आभूषण, नकद, फ्रिज, सोफा, कार सबकुछ बारिश भीग चुका है। जसलीन सिंह ने बताया कि पहले तालाब हुआ करता था, जिसमें दो-दो हाथियां डूब जाती थी। अब हाल देख सकते हैं।
आकांक्षा एन्क्लेव में तीन से चार फुट पानी भरा रहा
इसी तरह मुंशीनगर में आकांक्षा एन्क्लेव में तीन से चार फुट पानी भरा रहा, जिससे करीब 400 घरों को पानी के संकट से जूझना पड़ा। वहीं कर्मचारी नगर में त्रिवेणी एन्क्लेव में दो से तीन फीट पानी, पवन विहार में, छोटी बिहार में परवाना नगर, आधार शिला, कूर्मांचल नगर में नार्थ सिटी एक्सटेंशन, लाजपत नगर में दो-तीन फुट पानी भरा रहा। इसके अलावा गणेश नगर, बन्नू बाल कॉलोनी, मिनी बाइपास पर कई कॉलोनियां जहां अनियमित तरीके से बसाई गई हैं। जिसमें जलभराव की समस्या रहती है। ग्रीन पार्क के अंदर तो कई जगहों पर नदी के किनारे प्लाटिंग कराई जा रही है।
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बोले पार्षद :-
पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि आवास विकास की तरफ से करीब 12 साल पहले प्राधिकरण क्षेत्र में 197 अवैध कॉलोनियों की सूची जारी की गई थी। अब अनुमान है कि इसकी संख्या बढ़कर 300 हो गई होंगी। हालांकि बीडीए की तरफ से एक साल के अंदर स्वयं 14 अवैध कॉलोनियां को गिरा दिया गया। जलभराव से मुक्ति चाहिए तो पानी निकासी की व्यवस्था के बाद ही कॉलोनियों को अनुमोदन दिया जाएगा।
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बीडीए देता है प्लाटरों को पूर्णता प्रमाणपत्र :-
बरेली विकास प्राधिकरण की तरफ से निर्माण कार्य पूरा होने पर उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत पूर्णता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। यह इस बात का प्रमाणपत्र होता है कि भवन या कॉलोनी का निर्माण स्वीकृत बिल्डिंग बायलॉज और स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही हुआ है। इसमें बीडीए की टीम स्थलीय निरीक्षण के बाद प्रमाणपत्र देती है।
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वर्जन ...
शहर में तमाम बिल्डर्स तीन से छह फीट गहरे गड्ढे में लोगों को आवास का प्लॉट दे रहे हैं। जब बारिश होती है तो वहां रहने वाले लोगों को इसका दंश झेलना पड़ रहा है। साथ ही नगर निगम को लोगों का आक्रोश झेलना पड़ रहा है। जल निकासी से लेकर अन्य बिंदुओं पर बीडीए पूर्णता प्रमाणपत्र देता है। ऐसे बिल्डरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। - राजीव कुमार राठी, अधिशासी अभियंता, नगर निगम
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वर्जन ...
मुख्य नगर नियोजक की तरफ से कॉलोनियों के विकसित करने के दौरान पार्क, सड़क, वन क्षेत्र, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच की जाती है। इसके बाद पूर्णता का प्रमाणपत्र दिया जाता है। बीडीए क्षेत्र में सिर्फ 10 कॉलोनियों को ही पूर्णता प्रमाणपत्र जारी किया गया है। जलभराव हो रहा है तो इसके लिए अतिक्रमणकारी जिम्मेदार हैं जो नालों के ऊपर अतिक्रमण कर लिया है। इसके लिए नगर निगम को कार्रवाई करके जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए। -सौम्या पांडेय, वीसी बीडीए