बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पांडेय ने शुक्रवार को बरेली स्थित वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया। यहां लापरवाही का शर्मनाक चेहरा सामने आया है। निरीक्षण के दौरान न तो कोई पदाधिकारी मौजूद मिला और न ही व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। वृद्धाश्रम में रह रहीं महिलाएं दर्द से कराहती मिलीं, जिन्हें न समय पर दवा मिल रही है और न ही ढंग का भोजन।
महिला आयोग की सदस्य जब वृद्धाश्रम पहुंचीं तो वहां मात्र दो फोर्थ क्लास कर्मचारी मौजूद थे, जबकि कुल 16 कर्मचारियों की तैनाती दर्ज है। स्टाफ से उपस्थिति रजिस्टर मांगे जाने पर भी नहीं दिखाया गया। वहीं, नाश्ता भी नहीं दिया जा रहा है। खाने में भी पतली दाल और अधपका भोजन वृद्धाओं को परोसा जा रहा है।
गंदगी और मच्छरों के आतंक से सो नहीं पातीं वृद्धाएं
आश्रम के कमरों में गंदगी का आलम यह था कि रुकना तक मुश्किल हो गया। चादरें गंदी थीं, कमरों में झाड़ू तक नहीं लगी थी। मच्छरों की भरमार से वृद्धाएं पूरी रात सो नहीं पातीं। वहीं, निरीक्षण में पता चला कि डॉक्टरों की नियमित विजिट नहीं होती है। कई वृद्धाएं बीमार हैं, लेकिन उन्हें किसी डॉक्टर ने कई दिनों से नहीं देखा है। यह वृद्धाश्रम एक एनजीओ द्वारा संचालित है, लेकिन संस्था अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं दिखी। वहीं, समाज कल्याण विभाग की निगरानी भी नाम मात्र की हो रही है, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। निरीक्षण के बाद महिला आयोग की सदस्य ने स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई और कहा कि वृद्धजनों के साथ हो रही इस प्रकार की उपेक्षा अमानवीय है। उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को सौंपने और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है। संवाद