बरेली। अभिनेत्री दिशा पाटनी मामले में पुलिस की दो दिन की मेहनत पर पानी फिर गया। घटना वाले दिन सुबह राजस्थान के भरतपुर के नंबर से पाटनी परिवार के पास आई अटपटी कॉल से सुराग जोड़ने की भूमिका बनाए बैठी बरेली पुलिस की एसओजी भरतपुर से बैरंग लौट आई।
घटना वाले दिन सुबह करीब सात बजे जगदीश चंद्र पाटनी की पत्नी पदमा पाटनी के मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आई थी। परिवार के मुताबिक उन्होंने कॉल रिसीव की तो दूसरी तरफ से बताया गया कि आपका पार्सल आया है। रात के अंतिम पहर हुई फायरिंग से सहमा परिवार सुबह के वक्त अचानक पार्सल आने की बात से घबरा गया। हालांकि जब इन लोगों ने मना किया गया कि हमने कोई पार्सल नहीं मंगाया है तो दूसरी ओर से कॉल काट दी गई।
कोतवाल अमित पांडेय के मुताबिक जगदीश चंद्र पाटनी ने जांच के दौरान पुलिस को यह बात बताई और वह नंबर नोट करा दिया जिससे कॉल आई थी। जांच में पता लगा कि नंबर राजस्थान के भरतपुर निवासी शख्स का है। चूंकि इसी दिन राजस्थानी बदमाशों के गैंग ने हमले की जिम्मेदारी ले ली तो पुलिस को यकीन हो गया कि इस नंबर का इस्तेमाल कर रहे शख्स का घटना से जरूर कोई जुड़ाव है। नंबर चालू रहना अटपटा लगा, लेकिन एसओजी उसे सर्च कर भरतपुर पहुंच गई। वहां हकीकत पता लगी तो लौट आई। ब्यूरो
भरतपुर पुलिस भी सनकी से परेशान
- कोतवाल अमित पांडेय के मुताबिक आरोपी को पकड़ने पर पता लगा कि वह 82 की सीरिज वाले मोबाइल नंबरों पर दिन में 30 से 40 कॉल करता है। इनमें अधिकांश नंबर महिलाओं या लड़कियों के होते हैं। आदत के मुताबिक वह डिलीवरी मैन बनकर पार्सल आने की बात कहकर परिचय बढ़ाता है। कई मामलों में कॉलर के झल्लाने पर वह गालीगलौज कर कॉल काट देता है। यह भी संयोग था कि दिशा पाटनी की मां का मोबाइल नंबर भी इसी डिजिट का था। आरोपी के खिलाफ कई जगह रिपोर्ट दर्ज हैं और उसे जेल भेजा जा चुका है। भरतपुर पुलिस की मदद से एसओजी को ऐसे ही नंबरों पर की गई कॉल की ऑडियो रिकार्डिंग भी मिल गईं। सनकी से पूछताछ के बाद टीम लौट आई।
सुदर्शन पोर्टल ने उगला डाटा...33 अकाउंट संदिग्ध
- सुदर्शन पोर्टल के जरिये पुलिस ने 33 सोशल मीडिया अकाउंट खोजे हैं। चुनिंदा प्रोफाइल पर यहां संदिग्ध टिप्पणी की गई हैं। पुलिस अब टिप्पणी करने वालों को ट्रेस कर रही है। इनमें से अधिकांश अकाउंट राजस्थान के हैं। इनके अलावा मध्य प्रदेश व उप्र के भी कुछ संदिग्ध अकाउंट चिह्नित कर नजर रखी जा रही है। अब साइबर क्राइम थाना पुलिस व साइबर सेल इनके आईपी एड्रेस का पता कर रही है। - अनुराग आर्य, एसएसपी