बरेली। शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शरद अग्रवाल लोकगीतों व लोक कथाओं को नई पीढ़ी के लिए जीवंत रखने का काम कर रहे हैं। दिनभर रोगियों से घिरे रहने वाले डॉ. अग्रवाल ने मंझे हुए साहित्यकार की तरह दो पुस्तकों कहावतों की लोककथा और मनभावन लोकगीत की रचना की। दोनों पुस्तकों का विमोचन हिंदी पखवाड़े में भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली स्थित आवास पर किया।
सुधांशु त्रिवेदी ने डॉ. अग्रवाल के हिंदी, लोक साहित्य संरक्षण के प्रयास को सराहा। कहा कि भारतीय भाषाओं और लोक परंपराओं का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। यहां मौजूद उप्र के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि डॉ. शरद के हिंदी और लोक-साहित्य के क्षेत्र में किए जा रहे काम को पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। 14 सितंबर 2024 को हिंदी दिवस पर नई दिल्ली में चतुर्थ अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. शरद की पुस्तक ‘हिंदी कहावत कोश’ का विमोचन किया था।
डॉ. शरद ने बताया कि हिंदी पखवाड़ा 28 सितंबर तक है। इसमें हिंदी की कहावतों के पीछे छिपी लोककथा, जनश्रुति, सामाजिक संदर्भों को सामने लाने का प्रयास उन्होंने किया है। कहावतों का प्रयोग उनके संक्षिप्त अर्थ के साथ दैनिक जीवन में होता है पर उनके पीछे की कथा, घटना और लोक स्मृतियाें की जानकारी लोगों को नहीं है। दूसरी पुस्तक में पारंपरिक, आधुनिक लोकगीत जैसे विवाह गीत, सोहर, भात, जयमाल, त्योहारी का संगम है। इसमें लोक जीवन के विविध रंगों को सहेजने का प्रयास किया गया है। विमोचन के दौरान डॉ. अग्रवाल के परिवार के सदस्य व शुभचिंतक मौजूद रहे।