बरेली। बरेली कॉलेज के पूर्व शिक्षक व इन दिनों ताइवान में रिसर्चर के तौर पर कार्य कर रहे डाॅ. सैयद आतिफ अली व उनकी टीम ने हाल ही में एक बायो सेंसर विकसित किया है। आतिफ के अनुसार यह सेंसर शरीर में हो रहे छोटे-बड़े बदलावों पर नजर रखेगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अब तक स्मार्ट घड़ी व स्मार्ट बैंड जैसे अन्य उपकरणों की मदद से शरीर से जुड़ी कई जानकारियां प्राप्त की जाती रहीं हैं। मगर, चिकित्सकीय उपयोग के लिए ऐसे सेंसरों की आवश्यकता है जो मुलायम हों, शरीर के साथ आसानी से जुड़ सकें। इस बायो सेंसर में एक विशेष जैनस हाइड्रोजेल आधारित प्रेशर सेंसर विकसित किया गया है।
हाइड्रोजेल एक नरम और पानीयुक्त पदार्थ है, इसकी प्रकृति शरीर के सेल से काफी मिलती-जुलती है। इस सेंसर में तीन परतें हैं। ऊपर व नीचे विद्युत प्रवाह करने वाली और उनके बीच एक विद्युतरोधी परत है। इन तीनों परतों को एक ही हाइड्रोजेल प्रणाली में मजबूती से जोड़ा गया है।
जब इस सेंसर पर दबाव पड़ता है, तो इसकी संरचना में बदलाव होते हैं। इससे विद्युत संकेत में परिवर्तन आता है। इसी परिवर्तन को मापकर दबाव का पता लगाया जाता है। परीक्षणों में सेंसर ने बहुत कम दबाव को भी पहचानने की क्षमता दिखाई। इसकी प्रतिक्रिया लगभग 23 मिलीसेकंड में मिली और यह बार-बार दबाव देने पर भी स्थिर रूप से काम करता रहा।
इसकी मदद से शरीर की छोटी शारीरिक गतिविधियों से लेकर हाथ-पैर की गति जैसी बड़ी गतिविधियों तक को पहचाना जा सकता है। भविष्य में ऐसी तकनीक नाड़ी, श्वसन, शरीर की गतिविधियों और अन्य स्वास्थ्य संकेतों की निगरानी में उपयोगी हो सकती है।
काफी उपयोगी होगी यह तकनीक
इस सेंसर को विकसित करने के लिए बायोइलेक्ट्रॉनिक्स, बायोसेंसर, माइक्रोफ्लुइडिक तकनीक व नई जैव चिकित्सीय सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है, इस शोध को एडवांस्ड साइंसेज जर्नल में जगह मिली है। शोधकर्ता ने बताया कि बायो सेंसर निर्माण प्रक्रिया और कम लागत वाली सामग्री पर आधारित ऐसे सेंसरों का विकास भविष्य में स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सस्ते व व्यावहारिक पहनने योग्य स्वास्थ्य सेंसर बनाने में मदद कर सकता है। कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में किफायती स्वास्थ्य निगरानी तकनीक उपयोगी हो सकती है।