बरेली। शहर की देवरनिया नदी (किला) को प्रदूषण मुक्त करने की जिला प्रशासन की योजना को झटका लगा है। दो साल पहले शासन को भेजे गए 201 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इसके चलते नदी में गिरने वाले सात प्रमुख नालों को टैब नहीं किया जा सका है।
नदी अत्यधिक प्रदूषण, कूड़े-कचरे और अतिक्रमण के कारण एक नाले में बदल चुकी है। इसमें स्थानीय डेयरियों का मलबा, सीवर और मृत जानवर फेंके जा रहे हैं, जिससे पानी जहरीला और बदबूदार हो गया है। यह स्थिति जलीय जीवों के लिए भी घातक है। जल निगम शहरी ने राज्य सेक्टर कार्यक्रम के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में यह परियोजना तैयार की थी। इसमें नालों को टैब करके गंदे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की ओर मोड़ने की व्यवस्था है। सराय तल्फी में करीब आठ बीघा सरकारी भूमि चिह्नित की गई है, जहां 56 एमएलडी का एसटीपी बनना है। परियोजना में पंपिंग स्टेशन और ढाई किलोमीटर की सीवर लाइन बिछाने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य गंदे पानी को एसटीपी में उपचारित कर नदी में जाने से रोकना है।
परियोजना में शामिल प्रमुख नाले
जीपी टोला, कृष्णा हॉस्पिटल के पास, बाकरगंज पुलिस चौकी, साहू गोपीनाथ, बिहारीपुर, किला पुल और चौकी अशरफ खान गुलाब नगर के नाले इस परियोजना में टैब किए जाने हैं। ये सभी नाले देवरनिया नदी में मिलते हैं, जो आगे चलकर रामगंगा नदी में मिल जाती है। जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने बताया कि 201 करोड़ रुपये की परियोजना दो साल पहले भेजी गई थी, जिसे मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि किन कारणों से यह रुका है, इसका पता लगाकर प्रस्ताव दोबारा शासन को भेजा जाएगा। मंजूरी के अभाव में शहर का सीवर और नालों का गंदा पानी आज भी देवरनिया नदी में मिल रहा है।