बरेली। बरेली कॉलेज में मंगलवार को पिछड़ा वर्ग की मेरिट पर विवाद खड़ा हो गया। समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता प्राचार्य के पास शिकायत लेकर पहुंच गए। कहा कि ओबीसी महिला वर्ग की मेरिट अनारक्षित श्रेणी की महिला वर्ग की मेरिट से ज्यादा कैसे हो सकती है। अगर ऐसा है तो उन्हें आरक्षण न देकर अनारक्षित की श्रेणी में डाला जाए। इसे लेकर प्राचार्य कार्यालय में काफी देर तक कहासुनी होती रही। सछास कार्यकर्ताओं को जब आरक्षण संबंधी शासनादेश दिखाया गया, तो वह शांत हुए।
बरेली कॉलेज में इस बार बीएससी बायोलॉजी की ओबीसी महिला वर्ग की मेरिट का इंडेक्स 75 और अनारक्षित श्रेणी की महिला वर्ग का कटऑफ इंडेक्स 72 होने पर समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता पूछताछ करते प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव के पास पहुंच गए। उन्होंने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि पिछड़ा वर्ग की मेरिट ज्यादा हो और अनारक्षित श्रेणी की मेरिट कम हो। इसके बाद प्राचार्य ने आरक्षण संबंधी शासनादेश निकलवाया। उसमें लिखा है कि महिला वर्ग का आरक्षण भी हर श्रेणी का अलग-अलग होगा। यह आरक्षण उस वर्ग की मेरिट से ही निकाला जाएगा। अनारक्षित श्रेणी की महिला वर्ग की मेरिट अनारक्षित श्रेणी से क्षैतिज रूप में बनेगी और ओबीसी या एससी/एसटी वर्ग की महिला वर्ग की मेरिट संबंधित श्रेणी से निकलेगी। इसकी तुलना दूसरे वर्ग की कटऑफ से नहीं हो सकती है। यह नियम है कि सिर्फ पचास फीसदी जातीय आरक्षण वर्टिकल आधार पर दिया जाता है। इसके बाद बाकी के आरक्षण क्षैतिज रूप से बांटें जाएंगे। कुल संबंधित श्रेणी में से ही 20 फीसदी कटऑफ महिला वर्ग के लिए निकाला जाएगा। प्राचार्य ने कहा कि कटऑफ शासनादेश के तहत ही बनाई गई है।