बरेली। प्रशासन और महकमे के अफसरों की दरियादिली कहें या फिर कमजोरी का हिस्सा ही मान लिया जाए कि गल्तियों के बाद रंगे हाथ पकड़े जाने पर भी आला अफसरान जिला चिकित्सालय के डाक्टरों पर पूरी तरह मेहरबान हैं। कार्रवाई के नाम पर मात्र खानापूरी की जा रही है।
दरअसल, बदइंतजामी के तमाम मामले गवाह हैं कि जिला अस्पताल हमेशा से शासन प्रशासन के निशाने पर रहा है। नतीजतन यह रहा कि शिकायतों के ढेर की पुष्टि के लिए पहुंचे जिलाधिकारी ने रंगे हाथ बाजार की दवा लिखी पर्ची डाक्टर के नाम से पकड़ भी ली। मीडिया के सामने शासन को कार्रवाई के लिए लिखने का बयान भी दे दिया। लेकिन कार्रवाई को अंजाम तक डीएम भी नहीं पहुंचा पाए। उसी पुराने ढर्रे पर शासन को चिट्ठी गई। वहां से डाक्टर के पास नोटिस आया। चेतावनी मिली और इति हो गई।
इसी तरह सप्ताह भर पहले एडी से लेकर जेडी और सीएमओ को मरीजों ने डाक्टर साहब की लिखी पर्ची सौंपी। चूंकि स्टाफ को बचाना था, पुष्टि के लिए वार्ड पहुंचे तब बेड पर रखी बाजार से खरीदी दवाओं को देख चाह कर भी डाक्टर को बचाने का साहस नहीं जुटा सके। मीडिया साथ देख नोटिस भेजकर जवाब देने का दंभ भरा। सप्ताह भर बाद आज पूछा तब सीएमएस बोले चेतावनी दे दी गई है। सीएमएस डा. आरसी डिमरी ने कहा आज ही डाक्टरों को लिखित में कहा है जीवन रक्षक दवाएं खरीदने की मजबूरी हो तब हम खरीदकर देंगे।