बरेली। आरओ कंपनी की नौकरी चली जाने से डिप्रेशन में आए मॉडल टाउन निवासी उत्तम जीत सिंह ने खुदकुशी कर ली। उसने पहले हाथ की नस काटी और फिर जहरीला पदार्थ खा लिया।
किला क्षेत्र के मिनी बाईपास पर स्थित एकता पब्लिक स्कूल के बेसमेंट में बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे एक शव पड़ा देखा गया। विजिटिंग कार्ड के आधार पर उसकी शिनाख्त 45 वर्षीय उत्तम जीत सिंह निवासी ई-6 मॉडल टाउन के रूप में हुई। सूचना पर उसके बहनोई महेंद्र सिंह आदि परिवार वाले मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव के पास से एक बैग बरामद किया जिसमें काफी कागजात थे। शव के पास एक ब्लेड और सल्फास की पुड़िया बरामद हुई। मृतक के एक हाथ की नस कटी हुई थी और मुंह से झाग निकल रहा था। पैंट की जेब से उस कंपनी के लेटर पैड में लिखा सुसाइड नोट भी मिला जिसमें वह काम करता था। सुसाइड नोट में अपनी मर्जी से आत्महत्या करना लिखा है।
महेंद्र ने बताया कि उत्तम जीत सिंह बुधवार सुबह 11 बजे घर से निकला था। शाम तक घर न लौटने पर पत्नी शालू ने फोन किया मगर मोबाइल स्विच ऑफ था। पूरी रात कोई लोकेशन नहीं मिली। उन्होंने बताया कि उत्तम जीत सिंह एक वाटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम कंपनी में काम करता था। वह कंपनी की तरफ से घरों में आरओ लगाता था। लक्ष्य पूरा न होने पर छह महीने पहले नौकरी चली गई थी, तब से वह खाली ही घूम रहा था। घर में तंगहाली से उत्तम जीत डिप्रेशन में आ गया था।
स्कूल में शव मिलने से हड़कंप
-बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे एकता पब्लिक स्कूल में बच्चों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। इसी दौरान एक बच्चा स्कूल के एक तरफ बने बेसमेंट की तरफ गया। उसने एक व्यक्ति पड़ा देखा तो इसकी सूचना मैडम को दी। मैडम ने आसपास के लोगों को बुलाया। उन्होंने देखा कि यह मृत व्यक्ति पड़ा है। इसे देख बच्चे कांप उठे।
रात भर सिसकती रही सुखमणि
-उत्तम जीत की मौत के बाद उनकी कच्ची गृहस्थी उजड़ गई है। वह अपने पीछे पत्नी शालू के अलावा पुत्र अमन और पुत्री सुखमणि को रोता-बिलखता छोड़ गया है। सुखमणि कक्षा नौ में पढ़ती हैं, जबकि अमन बीटेक कर रहा है। उत्तम जीत के रात में घर न लौटने पर पत्नी शालू उनका फोन बार-बार ट्राई कर रही थीं। वहीं पिता की कोई लोकेशन न मिलने से परेशान पुत्री सुखमणि की पूरी रात सिसकते हुए गुजरी। सुबह जब मौत की खबर पहुंची तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया।
कोट
उत्तमजीत ने पहले हाथ की नस काटी, इसके बाद जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की है। आत्महत्या की वजह बेरोजगारी से तंग होकर करना बताई जा रही है। उसके पास से एक सुसाइड नोट, एक ब्लेड और सल्फास की पुड़िया बरामद हुई है। मामले की तहकीकात की जा रही है।
विद्याराम दिवाकर, इंस्पेक्टर किला
यह लिखा सुसाइड नोट में
मैं अपनी मर्जी से सुसाइड कर रहा हूं। इससे मेरे परिवार वालों से कोई लेना-देना नहीं है। मैं बहुत मजबूर होकर कदम उठा रहा हूं क्योंकि मैं छह महीने से बेरोजगार हूं। मेरे बीवी बच्चे खाने तक की मोहताज हो गए हैं। यह मेरे से देखा नहीं जा रहा है। मैं अपने बीवी बच्चों से माफी चाहता हूं। मैं उनका पालन पोषण नहीं कर पा रहा था इसलिए यह कदम उठा रहा हूं। मेरी जनकपुरी जो दुकान है उसे परिवार को सौंप दी जाए, जो उनकी रोजी रोटी का सहारा हो सके। मुझे किसी का कर्जा नहीं देना है। मेरे मरने के बाद सब कुछ परिवार का होगा। मेरी दुकान गुरु ऑप्टिकल वाले के किराए पर है। जिसका कोई एडवांस नहीं है। जो हर महीने किराए के हिसाब से ही है। उसमें सारा फर्नीचर मेरा है।
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शराब पीने पर मां ने डांटा
तो लगा ली आग, गंभीर
मीरगंज/दुनका(ब्यूरो)। धनेली की गौंटिया में कच्ची शराब पीने पर मां की डांट से क्षुब्ध युवक ने मिट्टी का तेल उड़ेलकर खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
शाही थाना क्षेत्र के गांव धनेली की गौंटिया निवासी बुद्धसेन (25) अपनी मां के साथ रहता है। उसका बड़ा भाई हरद्वारी लाल अपने परिवार के साथ अलग रहता है। बुधवार को ही हल्द्वानी से मजदूरी करके लौटे बुद्धसेन ने गुरुवार की सुबह जमकर कच्ची शराब पी ली। इस पर उसकी मां ने डांट दिया। इससे क्षुब्ध बुद्धसेन ने घर में रखा मिट्टी का तेल उड़ेलकर आग लगा ली। इससे वह करीब 60 प्रतिशत झुलस गया। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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बीमारी से आजिज व्यापारी ने आग लगाकर जान दी
आंवला। लंबी बीमारी से आजिज आ गए व्यापारी ने अपने ऊपर केरोसिन डालकर जंगल में आग लगा ली जिससे वहीं जलकर उसकी मौत हो गई। फसल की सिंचाई करने गए किसानों की सूचना पर मौके पर पहुंचे परिवार वालों ने सूचना दी तो पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा।
अलीगंज निवासी मृतक के भाई कृष्ण औतार गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उसका भाई रामौतार गुप्ता क्षेत्र में लगने वाली साप्ताहिक हाट में जाकर मौसमी अनाज की खरीद फरोख्त का कारोबार करता था। वह काफी दिनों से भगंदर की बीमारी से परेशान था। बीमारी की वजह से उसका कारोबार भी ठप होने की कगार पर था। इसी मानसिकता में उसने अपने ही खेत में जाकर खुद को आग लगाकर जान दे दी। रामऔतार का शव अलीगंज-बिशारतगंज रोड पर गांव के समीप उसके अपने ही खेत में मिला। वह अपने पीछे पत्नी के अलावा दो बेटियों को रोते-विलखते छोड़ गया है।
दिन मे ही बना ली थी मरने की योजना
पडौसियो के मुताबिक रामौतार बीमारी के चलते कुछ चिडचिडा हो गया था लेकिन इसके बाबजूद भी शांत दिखता था। बताया बुद्धवार को म्रतक ने आस पास वालो से लिये गये उधार के रूपये वापस करते हुये आगे से उधार ने लेने की बात कही थी। म्रतक की पत्नी और बेटी ने बताया बुद्धवार की शाम पांच बजे म्रतक घर से बाहर गये थे देर रात वापस न लौटने पर परिजनो को जानकारी दी काफी तलाश किया लेकिन नही मिले।
नही सुनाया दुखना‘:
म्रतक रामौतार के अजीज दोस्त राजेश गुप्ता बताते है कि बुद्धवार की शाम को उसको अंतिम करीब आठ बजे दखा था उस समय गुडडू,अल्ली, सहित अन्य ग्रामीण थे उस समय काफी देर तक व्यापार संबधी बाते चलती रही रोज शाम को मिलते बख्त अपनी बीमारी के बारे मे बात करने वाला रामौतार ने बुद्धवार को इस बारे मे कोई चर्चा नही की और शांत रहा।