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तो ऐसे होती है पास्को के मामले की जांच!

Tue, 13 Aug 2013 05:37 AM IST
Bareilly
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बरेली। सीबीगंज पुलिस ने चार लड़कों पर नाबालिग लड़की को प्रताड़ित करने (गैंगरेप पुलिस मान ही नहीं रही है)की शिकायत पर पास्को एक्ट के तहत मुकदमा तो दर्ज कर लिया जांच प्रक्रिया में किसी नियम का पालन नहीं हो रहा है। पुलिस लड़की और उसके परिवार को संरक्षण देने के बजाय लड़की के पिता को धमका रही है। उनसे यहां तक कह दिया गया कि लड़की के बयान टेप कर लिए गए हैं। वह एक लड़के का पक्ष ले रही है। सहयोग नहीं करने पर लड़की को मुल्जिमों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
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रविवार को सीबीगंज इलाके में 16 वर्षीय किशोरी के साथ पांच युवकों ने दुष्कर्म किया था। किशोरी शाम साढ़े छह बजे दवा लेने को घर से गई थी। परिवार वालों के तलाशने पर रात में 12.30 बजे खाली मकान में बेसुध पड़ी थी। जिला महिला अस्पताल में लड़की का इलाज हुआ। जहां होश आने लड़की को भी खूब धमकाया। इस मामले की विवेचना कर रहे एसआई रघुनंदन सिंह ने जिला महिला अस्पताल में लड़की से पूछताछ की। उनके साथ कोई महिला अधिकारीा नहीं थी, हां कांस्टेबल पंकज कुमारी मौजूद थी। दरोगा ने अपने हिसाब से समझाकर मोबाइल में लड़की की बात रिकार्ड कर ली। पिता ने सीबीगंज थाने जाकर घटना की तहरीर दी। लड़की के पिता का कहना है कि उसमें लिखी असली घटना देखकर पुलिस को पसीना आ गया। पुलिस ने लड़की के घर वालों को जमकर हड़काया। आखिर में यहां तक कह दिया कि लड़की का बयान रिकार्ड कर लिया गया है। अगर अदालत के सामने बयान बदला तो लड़की मुल्जिमों के सुपुर्द कर दी जाएगी। पुलिस ने इस तरह धमकाकर पहली तहरीर फड़वा दी। उसके बाद अपने हिसाब से तहरीर लिखवाकर आरोपी युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
लड़की को मुल्जिमों के हवाले कर दिए जाने की बात से घर वाले दहशत में हैं। पुलिस के सामने किसी से बात करने से तक से डर रहे हैं। पुलिस भी पीड़ित और उसके घर वालों को किसी से बात नहीं करने दे रहे। मीडिया से तो बिल्कुल नहीं। इस तरह पुलिस पीड़ित के बजाय मुल्जिमों के साथ खड़ी दिख रही है।
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डरे सहमे हुए हैं घर वाले
लड़की के माता-पिता को आरोपियों को सजा दिलाने से ज्यादा बाकी बच्चों की चिंता है। वजह है मुल्जिमों की गुंडई और पुलिस की धमकियां। सोमवार को लड़की के पिता कुछ बोलने को तैयार नहीं थे। ज्यादा कुरेदने पर कहने लगे। दिमाग बहुत परेशान है। इज्जत गई सो गई दुश्मनी बनी सो अलग। मुल्जिम पक्ष के लोग गुंडे हैं। उन्हें कुछ हो गया तो बाकी बच्चों का क्या होगा।
ताक पर कानून
जांच महिला अधिकारी के बजाय पुरुष दरोगा कर रहे हैं।
लड़की की मेडिकल रिपोर्ट घर वालों को नहीं दी गई।
अधिवक्ता और मनोवैज्ञानिक नियुक्त नहीं किए गए।
दूसरे दिन भी कोई बड़ा अधिकारी न मौके पर नहीं गया।
पूर्व प्रधान के बेटे पर लग चुकी है रासुका
पीड़ित के पिता की तरफ से लिखाई गई रिपोर्ट में पांच मुल्जिमों के नाम हैं। इनमें नसीम खां आपराधिक किस्म का है। सीबीगंज थाने में उसके खिलाफ जानलेवा हमला करने समेत पांच मुकदमे दर्ज हैं। उस पर रासुका भी लगाई जा चुकी है। नसीम के पिता पूर्व प्रधान हैं। साल भर पहले उस पर बलात्कार का आरोप भी लगा था। बाकी चारों की गुंडई से भी लोग परेशान हैं। गैंग रेप की घटना का पता चलने के बाद से बिबियापुर और अटा कायस्थान के लोगों में गुस्सा है। उनका कहना है कि मुल्जिमों को कड़ी सजा मिले।
लड़की बेहोश कैसे हुई नहीं पता
न तो डॉक्टर बताने को तैयार और न ही पुलिस
बरेली। अभियुक्तों ने े मोटर साइकिल पर बैठा लिया, उसके बाद उसे नशा देकर बेहोश कर दिया गया। इसके बाद क्या हुआ, कुछ भी नहीं याद है। लड़की बार-बार यही कह रही है। लेकिन, उसे नशा कैसे दिया गया, इंजेक्शन से या फिर दवाई या रूमाल या फिर किसी और चीज से, इस बारे मेें जिला अस्पताल के डॉक्टर बताने को तैयार ही नहीं हैं। पुलिस पहले से ही इस मामले को दबाने में लगी हुई है। ऐसा लग रहा है कि लड़की के संकोचों और कुछ छिपाने की बात का फायदा उठा कर पुलिस यह कहानी दबा ही न दे।
सोमवार को लड़की को जिला अस्पताल में एक्स-रे के लिए लाया गया। उस दौरान भी अस्पताल में लड़की के साथ महिला कांस्टेबल का ऐसा पहरा रहा कि मीडिया तक से बातचीत नहीं करने दी गई। पुलिस, पूरे मामले को रहस्य ही बने रहने देना चाहती है। दरअसल, लड़की की जिस लड़के साथ दोस्ती रही है, वह उसे बचाने की वजह से सारे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। इसलिए, वह पूरी कहानी बताने से बच रही है। लड़की की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर पुलिस पूरे मामले को गोलमोल कर रही है। जिला अस्पताल भी मामले को दबाने में लगा हुआ है। इसलिए, 12 घंटे तक लड़की को लेबर रूम में रखने के सवाल पर डॉक्टर गोलमोल जवाब देते हुए कहती हैं कि वार्ड में कहीं रखने से लड़की भाग जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती, इसलिए उसे लेबर रूम में रखना पड़ा। उनके मुताबिक, जब वह अस्पताल में लाई गई तब भी नशे की हल्की बेहोशी में थी, लेकिन मेडिकल करने के समय तक उसे होश आ गया था। लेकिन, जब यह पूछा गया कि नशा कैसे दिया गया, इस पर डॉक्टर ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। लड़की के पिता का तो यहां तक कहना है कि लेबर रूम में परिवार वालों तक से लड़की को नहीं मिलने दिया गया।
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