बरेली। अमर उजाला और भक्ति वेदांत कैंसर इंस्टीट्यूट के कैंप में रविवार को यहां दो सौ लोगों ने जांच कराई। कैंप में 18 मरीजों में कैंसर होने की पुष्टि हुई। सभी में मर्ज अभी प्राथमिक चरण में हैं। चिकित्सकों का कहना है कि मुंबई में उपचार के बाद ये सभी पूर्णत: स्वस्थ हो सकते हैं। बीपीएल कार्डधारकों का नि:शुल्क और शेष का रियायती दरों पर उपचार होगा। इलाज प्रख्यात कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विष्णु अग्रवाल करेंगे।
डेलापीर स्थित केशलता अस्पताल में आयोजित कैंप में पहुंचे मरीजों में करीब 20 फीसदी खुद को कैंसर होने के शक में पहुंचे। चिकित्सकीय परीक्षण में उनमें कैंसर न होने की पुष्टि हुई। ये रोग होने की शंका में होने वाली घबराहट (एनजाइटी न्यूरोसिस) से पीड़ित थे। तीन महिलाओं को ब्रेस्ट में गांठ होने पर कैंसर पीड़ित होने का शक था। परीक्षण में पता चला गांठ तो है लेकिन वह कैंसर नहीं है। गांठ को ऑपरेशन से निकाला जा सकता है। कैंप में मौजूद चिकित्सकों ने इन्हें बेफिक्र होकर संयमित खानपान शैली और दिनचर्या को अपनाने की सलाह दी।
अन्य पंजीकृत हुए मरीजों में से मुख कैंसर से पीड़ितों की संख्या सबसे ज्यादा करीब 35 फीसदी रही। इसके बाद पित्त की थैली में कैंसर वाले करीब 30 फीसदी मरीज रहे। शेष 45 फीसदी में गले, गुदा, आंत, फेफड़ा, ब्रेस्ट, बच्चेदानी आदि में कैंसर से पीड़ित थे। तीसरे पहर एक घंटा अमर उजाला की रूपांतरण के सदस्यों के लिए निर्धारित था। इस दौरान रूपांतरण की 25 सदस्य परीक्षण को पहुंचीं।
डॉ. अग्रवाल ने 25 मरीजों का परीक्षण वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से किया। उन्होंने लोगों की शंका और समस्याओं का समाधान किया। कैंप में शाम तक मरीजों का पहुंचने का क्रम जारी था। कैंप में डा. अग्रवाल के सहयोगी डा. विश्वमोहन और कैंप कोआर्डिनेटर डा. नेत्रपाल सिंह के अलावा केशलता अस्पताल के आंकोलाजिस्ट डॉ. आरके चितलांगिया ने बाकी मरीजों का परीक्षण कर उन्हें परामर्श दिया।
चिकित्सकों की सलाह
- पित्त की थैली में फैट के चलते ही गांठ बनती है और उसमें कैंसर के होने का खतरा ज्यादा होता है
- फैट के स्रोत घी के सेवन से बचा जाए
- पनीर को उबालने के बाद खाया जाए। इससे पनीर का फैट अलग हो जाता है और उसमें सिर्फ प्रोटीन बचा रहता है
- चोकर युक्त आटे की रोटी का सेवन जरूर किया जाए
- किसी भी रूप में तंबाकू के सेवन से परहेज करें