बरेली। कालीबाड़ी मंदिर में घुसकर पुजारी को उठा ले जाने के मामले में किरकिरी होने के बाद पुलिस अब बैक फुट पर आ गई है। हालांकि इस मामले में एसपी सिटी और एसपी क्राइम के बयानों में विरोधाभास है। उधर क्राइम ब्रांच के कई सिपाही अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिनभर गायब रहे।
पुजारी को जुआ और सट्टा कराने के इल्जाम में क्राइम ब्रांच के सिपाहियों के उठा ले जाने के बाद शनिवार को एसपी क्राइम डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह का सीयूजी फोन रिसीव नहीं हुआ। हालांकि रविवार को उन्होंने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम उनके आदेश पर ही कालीबाड़ी गई थी। लेकिन उन्होंने पुजारी को उठाने को नहीं कहा था। मंदिर के पास ही कई और लोग जुआ और सट्टा कराते हैं। जबकि शनिवार एसपी सिटी त्रिवेणी सिंह ने बताया था कि पुजारी को जुआ कराने के शक में उठाया गया था।
एसपी क्राइम ने बताया क्राइम ब्रांच के सिपाहियों ने मंदिर में घुसकर पुजारी को उठाकर गलत किया था। इसलिए जो सिपाही मंदिर में पुजारी को उठाने के घुसे थे, सीसीटीवी की फुटेज देखकर उन्हें निलंबित कर दिया गया। जांच चल रही है। इस मामले में जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
पुलिस की अब किरकिरी हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस बिना सुबूतों के मंदिर में क्यों घुसी। पुजारी पर जुआ और सट्टा कराने का शक भी था तो यह इतना बड़ा तो अपराध नहीं है कि इसके लिए मंदिर में दबिश देने की जरूरत पड़ गई। इस मामले में पुलिस पर और भी तोहमतें लगीं।
पुजारी को असलाह लगाकर उठा ले गए थे
-पुजारी अंकित के भाई नितिन ने बताया कि शनिवार की रात साढ़े आठ बजे कालीबाड़ी मंदिर में पूजा की तैयारी चल रही थी। इसी बीच दो सिपाही सादे कपड़ों में आए और असलाह के बल पर वह अंकित को उठा ले गए थे। सेवादार विशम्भर दयाल भी वहां मौजूद थे।