बरेली। मार्च के आखिरी हफ्ते में जिला योजना की धनराशि खर्च करने की होड़ मची रही। हालांकि स्वीकृत बजट का 30 फीसदी हिस्सा ही मिल पाया लेकिन उसका एक बड़ा भाग आखिरी कुछ घंटों में आनन-फानन में खर्च कर दिया गया। मार्च के आखिरी हफ्ते में ही 23 करोड़ से ज्यादा रकम खर्च हुई। वित्तीय वर्ष के 11 महीनों यानी फरवरी तक 48.75 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि मार्च में 23.02 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए हैं। मार्च में खर्च हुई रकम का ज्यादा हिस्सा आखिरी सप्ताह में ही खर्च हुआ।
चार अप्रैल को तैयार हुई रिपोर्ट देख जानकार भी भौचक्के रह गए। रिकॉर्ड की मानें तो जिला योजना 2012-13 में जितनी भी धनराशि मिली, उसमें से 4.57 लाख रुपये को छोड़कर बाकी राशि स्वीकृत प्रोजेक्टों पर खर्च कर दी गई। हैरानी की बात तो यह है कि ग्राम्य विकास के चलाई गई खास योजना ‘स्वर्णजयंती स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई)’ के तहत 1.10 करोड़ रुपये तीस मार्च की शाम को आया। फाइनल रिपोर्ट में इसे भी खर्च दिखा दिया गया है, जबकि इस धनराशि से स्वयं सहायता समूहों को अनुदान दिया जाना है। दो तीन दिनों में ही यह कैसे बंट गया, किसी के समझ नहीं आ रहा। इसी तरह से पशु चिकित्सा विभाग, वैज्ञानिक अनुसंधान, पंचायती राज, मनरेगा और सड़क मद में मार्च में ही मिली धनराशि को भी पूरा खर्च दिखाया गया है। विकास भवन के सूत्रों की मानें तो मार्च में खर्च दिखाई गई रकम के मामले में जांच करा ली जाए, तो सारी असलियत खुद ब खुद सामने आ जाएगी!
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वर्ष 2012-13 की जिला योजना एक नजर में
कुल स्वीकृत राशि : 203.67 करोड़ रुपये
प्राप्त धनराशि : 61.77 करोड़ रुपये
प्राप्त धनराशि (प्रतिशत में) : 30.33 प्रतिशत
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इन विभागों को नहीं मिला एक नया पैसा
विभाग स्वीकृत राशि (लाख रुपये) प्राप्त राशि
सहकारिता विभाग 1.00 0.00
पर्यटन विभाग 20.00 0.00
खेलकूद 50.00 0.00
एलोपैथिक चिकित्सा 1200.00 0.00
होम्योपैथिक चिकित्सा 73.85 0.00
आयुर्वेदिक चिकित्सा 35.58 0.00
ग्रामीण जल कार्यक्रम 3678.75 0.00
समाज कल्याण (सामान्य) 73.91 0.00
शिल्पकार प्रशिक्षण 115.00 0.00
समाज कल्याण 277.93 0.00
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इन विभागों को आखिरी वक्त में मिली कुछ राशि (लाख रुपये में)
विभाग धनराशि
पशु चिकित्सा विभाग 2.30
एसजीएसवाई 110.02
मनरेगा 204.60
पंचायतीराज 60.98
सड़क एवं पुल 205.78
वैज्ञानिक अनुसंधान 4.20
प्रादेशिक विकास दल 0.06
इंदिरा आवास 87.14
नगर विकास 8.21
अनुसूचित जाति (कल्याण) 66.55
समाज कल्याण (सामान्य) 53.91
विकलांग कल्याण 241.43
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4.57 लाख रुपये सरेंडर
उद्यान विभाग ने 1.85 लाख रुपये और गन्ना विभाग ने 2.72 लाख रुपये सरेंडर किए। उद्यान विभाग को मिली धनराशि नेशनल हार्टिकल्चर मिशन के राज्यांश के तौर पर खर्च होनी थी, लेकिन जिस अनुपात में केंद्र से राशि मिली, उसमें इसे खर्च करने की गुंजाइश नहीं बची। गन्ना विभाग समय रहते पौध आदि तैयार करने में इस धन का उपयोग नहीं कर पाया।
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हर साल ही बजट का बड़ा हिस्सा आखिरी वक्त में रिलीज होता है। धनराशि ड्रॉ करके उसे खर्च में दिखा दिया जाता है। यह भी संभव है कि यह राशि अगले कुछ दिनों ही लाभार्थी के खाते में पहुंचे। अगर खर्च में कहीं कोई गड़बड़ी की शिकायत है, तो उसकी जांच करा ली जाएगी।
- नरेंद्र सिंह पटेल, सीडीओ