बरेली। उत्तर प्रदेश में बाल अधिकारों के हनन और उत्पीड़न की 36 शिकायतों के बारे में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) तलब की है। पीड़ित के मेडिको लीगल के ब्योरे के अलावा इसमें स्पष्ट करने को कहा है कि इन मामलों में एफआईआर कराई गई कि नहीं, पीड़ित को साइको-सोशल सपोर्ट दिया कि नहीं और उसके पुनर्वास या मुआवजा के लिए क्या पहल की गई। बरेली मंडल के इनमें चार मामले हैं, जिनमें तीन बरेली और एक शाहजहांपुर का है।
शाहजहांपुर निवासी अंशु सिंह ने आयोग में शिकायत की थी कि ऑब्जरवेशन होम में उनके बच्चे का सही उपचार नहीं हुआ। बरेली में पहला केस राजकीय संप्रेक्षण गृह में आठ नवंबर 2012 का है। इसमें आंवला के ओम प्रकाश यादव की शिकायत थी कि संप्रेक्षण गृह में रहने वाले बच्चों के साथ अधीक्षक ने अमानवीय व्यवहार किया। दूसरा केस आब्जरवेशन होम में उत्पीड़न के बाद बच्चे की मौत का है। यह घटना 29 दिसंबर 2012 की है और बदायूं के फैजगंज थाना क्षेत्र निवासी डैनी ने इसकी शिकायत की है। तीसरा केस चार अक्तूबर 2012 का है, जिसमें शेरगढ़ निवासी राजेंद्र प्रसाद ने आब्जरवेशन होम अधीक्षक पर कुपोषित बच्चे के इलाज के लिए घूस मांगने का आरोप लगाया था।
इसके अलावा आयोग ने मथुरा, वाराणसी और जौनपुर में तीन-तीन और गौतम बुद्ध नगर, देवरिया और मऊ में बाल अधिकार हनन के दो-दो मामले पाये हैं। अंबेडकरनगर, मैनपुरी, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, कासगंज, आजमगढ़, बिजनौर, लखनऊ, आगरा, गोंडा, फर्रुखाबाद, गाजियाबाद, बांदा और सिद्धार्थनगर में एक-एक मामले मिले हैं। शासन ने सभी जिलाधिकारियों से ऐसे मामलों की एटीआर देने को कहा है।