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पहले भी हो चुकी है एक मासूम बच्ची की मौत

Fri, 08 Feb 2013 05:31 AM IST
Bareilly
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बरेली। जिला अस्पताल में डॉक्टरों पर मरीजों की अनदेखी के आरोप नए नहीं हैं। छह महीने पहले रात के वक्त अस्पताल में लाई गई एक मासूम बच्ची की मौत इसलिए हो गई थी, क्योंकि उसे समय पर इलाज नहीं मिल पाया था। उस बच्ची का इलाज भी डॉ. एसके सागर कर रहे थे। उन पर नर्स के बार-बार फोन करने के बावजूद घर से उठकर अस्पताल न आने का आरोप लगा था। अब इसे इत्तफाक माना जाए या कुछ और कि मोतीराम मौर्य के बेटे विशाल की मौत के लिए भी डॉ. एसके सागर को ही जिम्मेदार ठहराया गया है।

बच्चे की मौत के बाद सीएमएस ऑफिस में छिपे
विशाल की मौत के बाद गुस्साए मोतीराम मौर्य का सामना होने से बचने के लिए डॉ. एसके सागर सीएमएस डॉ. कर्मेंद्र के ऑफिस में छिप गए। अपर निदेशक सह प्रमुख अधीक्षक डॉ. एके जैन ने बताया कि गुस्से से भड़के मोतीराम के डॉ. सागर के साथ बदसलूकी करने की आशंका थी, इसलिए उन्हें डॉ. कर्मेंद्र के कक्ष में बैठा दिया गया था।
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घूस मांगने के आरोप भी आम
जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों पर इलाज के लिए मरीजों से रिश्वत मांगने के भी आरोप लग चुके हैं। हालांकि जांच के बाद दोनों डॉक्टरों को अस्पताल प्रशासन ने क्लीन चिट दे दी। पिछले दिनों एक्सरे फिल्म खत्म होने पर मरीजों को दो दिन तक परेशानी झेलनी पड़ी थी। इसमें भी लापरवाही सामने आई थी, क्योंकि एक्सरे फिल्म खत्म होने की सूचना समय से दी ही नहीं गई।
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घर में सबका दुलारा था विशाल
वृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में दम तोड़ने वाला विशाल मोती राम मौर्य का बड़ा बेटा था। मोती राम ने बताया कि उनका छोटा बेटा ठीकठाक है। लेकिन पहली संतान होने के कारण विशाल परिवार के सभी लोगों का दुलारा था। वह मेहनत-मजदूरी करते हैं और काफी गरीबी में गुजर-बसर करने के बावजूद वह किसी तरह विशाल का इलाज करा रहे थे।
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