बरेली। रामगंगा नगर के लिए भूमि अधिग्रहण की कोशिश जुटे बीडीए के अफसरों को मंगलवार को थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन कई नई दिक्कतें भी खड़ी हो गईं। डीएम इस पर तो राजी हो गए जमीन की दरें तो पुरानी ही रखी जाएं, लेकिन इस पर विधिक राय लेने का आदेश दिया कि मुआवजा किस आधार पर घोषित किया जाए।
रामगंगा नगर के लिए भूमि अधिग्रहण को वर्ष 2006 में धारा चार और छह की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद बीडीए ने मुआवजे के लिए काफी रकम भी एसएलएओ दफ्तर में जमा कर दी, लेकिन कई और औपचारिकताएं पूरी न होने की वजह अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। बीडीए अफसर चाहते थे कि चंदनपुर, बिचपुरी, डोहरिया, मोहनपुर, रामनगर और अहरौला गांव में मुआवजे की राशि तय हो जाए ताकि उसके बंटते ही जमीन उसे मिल जाए। इसीलिए फाइल बनाकर डीएम को भेजी गई थी।
मंगलवार को डीएम ने बीडीए अफसरों के साथ बैठक की और उनके इस तर्क को मान लिया कि चूंकि नोटिफिकेशन वर्ष 2007 में ही चुका है, इसलिए तभी तय हुई दरें मान ली जाए। बीडीए अधिकारी इसे बढ़वाना चाहते थे, ताकि करार करने में किसान दिलचस्पी दिखाएं, लेकिन डीएम ने दोबारा दरें तय करने को नियम विरुद्ध बताते हुए इन्कार कर दिया। तय हुआ कि बीडीए ज्यादा से ज्यादा करार कर लें, उसके बाद धारा 11 की कार्रवाई कर दी जाएगी। जिसमें किसानों को जमीन देना ही होगी, हालांकि तब किसानों को ब्याज, प्रतिकार और कई दूसरे लाभ दिए जाएंगे। इस पर यह भी पेच फंसा कि मुआवजे की राशि करार नियमावली के तहत दी जाएगी या नहीं। इसका परीक्षण कराते हुए डीजीसी से विधिक राय लेने के डीएम ने निर्देश दिए।