बरेली। नेकपुर में चल रही शराब की दुकान को हटाने के बारे में आबकारी विभाग को फैसला लेने में एक साल लग गया। साल भर पहले इस दुकान के खिलाफ लोगों ने कई दिनों तक प्रदर्शन किया था। डीएम ने इस पर दुकान के बारे में जिला आबकारी अधिकारी से रिपोर्ट मांगने की बात कह कर लोगों को शांत कर दिया था। जिला आबकारी आनंद शंकर राय ने आबकारी निरीक्षक थर्ड की रिपोर्ट के आधार पर अब कहीं जाकर डीएम को जवाब भेजा है। इसमें कहा गया है कि यह दुकान आवासीय नहीं, बल्कि व्यावसायिक क्षेत्र में है। साथ ही कैंटीन भी अंदर है और बाहर लगने वाले ठेले-खोमचों को रोक दिया गया है। साथ ही जोड़ा है कि इस दुकान से साल भर में 1.37 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व मिलता है। इन आधारों पर जिला आबकारी अधिकारी ने दुकान न हटाने की संस्तुति की है।
नेकपुर में यह दुकान ओवरब्रिज के पास है। क्षेत्र के लोगों का इसे लेकर काफी समय से विरोध है। उनका कहना है कि दुकान से थोड़ी ही दूरी पर स्कूल, महिला अस्पताल और एक मंदिर है। इससे आम लोगों को खराब स्थिति का सामना करना पड़ता है। नेकपुर में रहने वाले नगर निगम के तमाम सफाई कर्मियों के संगठन ‘सेनेट्री सुपरवाइजर वेलफेयर एसोसिएशन’ के पदाधिकारियों ने भी विरोध किया था। उनका कहना था कि गांवों से आने वाले तमाम मजदूर दिन भर मजदूरी करने के बाद यहां से गांव को बस पकड़ते हैं तो उससे पहले ही कमाई हुई रकम बर्बाद कर देते हैं। इससे तमाम परिवारों में आर्थिक संकट तक हो गया है। वहीं नेकपुर में आए दिन झगड़े होते हैं। एसोसिएशन ने पिछले साल जनवरी के पहले सप्ताह में ज्ञापन दिया था। जस्टिस पार्टी ने भी लगभग ऐसी ही बातें कहते हुए पिछले साल ही 12 जनवरी को ज्ञापन सौंपा था। इन ज्ञापनों पर जिला आबकारी अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई थी।