बरेली। डीआईओएस दफ्तर से फर्जी शिक्षिका के नाम जीपीएफ की मद में 20 लाख का फर्जी चेक जारी करने के मामले को कमिश्नर ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले में जेडी से एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है। 19.25 लाख का यह फर्जी चेक जारी कराने में डीआईओएस दफ्तर का ही एक बाबू की प्रमुख भूमिका मानी जा रही है। फर्जी चेक स्वीकृत करने वाले उपमंडलीय शिक्षा निदेशक (डीडीआर) ने भी अब डीआईओएस को मामले की तुरंत जांच कराकर दोषी बाबू पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे दिए हैं।
चाचा नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका शाजिया परवीन के नाम से डीआईओएस ने जीपीएफ की मद में 19.25 लाख का फर्जी चेक जारी कर दिया था। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में जब एकाउंट नंबर पर शक हुआ तो प्रबंधक ने छानबीन की। इस वजह से पोल खुल गई और चेक का भुगतान नहीं हो पाया। इस चेक पर डीआईओएस के साथ डीडीआर ने भी दस्तखत किए थे। सबसे अहम बात चेक पर शाजिया परवीन को प्रवक्ता बताया गया था जबकि हायर सैकेंड्री स्कूलों में प्रवक्ता पद होता ही नहीं है।
अमर उजाला ने 21 नवंबर के अंक में यह समाचार प्रकाशित होने के बाद से डीआईओएस दफ्तर में हड़कंप मचा हुआ है। दो दिन से डीआईओएस और उनके बाबू आपस में मंत्रणा करने में मशगूल हैं। अब फर्जी चेक स्वीकृत करने के मामले में डीडीआर अहिवरनलाल ने भी डीआईओएस को तुरंत जांच कर दोषी बाबू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे दिए हैं। उधर, मंडलायुक्त ने भी 19.25 लाख के फर्जी नाम से चेक जारी किए जाने का संज्ञान लेते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) माया निरंजन को इस मामले में एक हफ्ते के अंदर आख्या देने को कहा है।
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बाबू का टाइप राइटर कब्जे में लिया
सूत्रों के मुताबिक जिस टाइपराइटर से जीपीएफ के बिल पर चाचा नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम लिखा गया, उसे डीआईओएस ने लिपिक के रूम से उठवाकर अपने ऑफिस में रखवा लिया है। जिस नाम से जीपीएफ निकालने की कोशिश की गई, उस नाम की शिक्षिका इस विद्यालय में तो क्या जिले के किसी विद्यालय में नहीं है।
24 लाख का भुगतान भी विवादित
शहर के एक विद्यालय के शिक्षक को एक महीने पहले किया गया 24 लाख का जीपीएफ भुगतान भी विवाद के घेरे में है। बताया जाता है कि ये जीपीएफ चेक भी किसी फर्जी शिक्षक के नाम से काटा गया है। सूत्रों के मुताबिक डीआईओएस दफ्तर के बाबुओं से मिलकर फर्जी शिक्षकों के नाम से जीपीएफ निकालने के लिए बाहर का गैंग सक्रिय है। अफसर भी इससे इनकार नहीं कर रहे हैं।