मोहसिन पाशा
बरेली। माफिया डॉन ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव ने गुजरात पुलिस के उन आरोपों का खंडन किया है, जिसमें उस पर बरेली सेंट्रल जेल से साम्राज्य चलाने और सूरत की निचली अदालत में पेश होने पर आपत्ति की बात कही गई है। बबलू श्रीवास्तव ने शनिवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके राय को पत्र लिखकर गुजारिश की है कि उसे सूरत भेजने की व्यवस्था की जाए, क्योंकि गुजरात पुलिस के आरोपों का निवारण होना जरूरी है। पुलिस यूपी की हो या गुजरात की, उसे कहीं की पुलिस के साथ जाने पर आपत्ति नहीं है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि बबलू का पत्र डीएम के पास भेज दिया गया है। अगली कार्रवाई उनके निर्देश पर होगी। बता दें कि बबलू की 25 अगस्त को सूरत की निचली अदालत में पेशी प्रस्तावित है। हालांकि फोर्स नहीं मिल पाने के कारण 25 अगस्त को उसे सूरत भेजा जाना संभव नहीं दिख रहा है।
मार्च 2014 को सूरत में अहमद फजल दलाल की हत्या की साजिश के मामले में वारंट जारी करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस गोपाल गौड़ा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष गुजरात सरकार के हलफनामा दाखिल करने के बाद बबलू श्रीवास्तव को जेल में मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। गुजरात पुलिस ने बबलू पर जेल में रहकर मोबाइल फोन के जरिए आपराधिक साजिशों को अंजाम देने का आरोप लगाया है।
इस बारे में वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि अदालत के आदेश पर बबलू की बैरक में टीवी लगवाया गया है। सिगरेट पीने की भी अदालत से ही उसे अनुमति मिली है।