बरेली। रोजगार सेवक के फांसी लगाकर आत्म हत्या करने का मामला विवादों में फंस गया है। रोजगार सेवक के परिवार वालों और रोजगार सेवक संघ ने फांसी लगाने की वजह 26 महीने से मानदेय न मिलना बताया था, लेकिन प्रशासन ने दावा किया है कि रोजगार सेवक ने फांसी मानदेय न मिलने की वजह से नहीं बल्कि घरेलू कलह की वजह से लगाई। अफसरों की मानें तो रोजगार सेवक शराब का नशा करने का आदी है। ब्लाक में भी वह शराब के नशे में आ जाता था। लक्ष्य के अनुरूप मानव दिवस सृजित न करने पर उसे नौ बार चेतावनी नोटिस भी दिया जा चुका है। सीडीओ ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
ब्लाक क्यारा के गांव हिंडौलिया भोलापुर निवासी रोजगार सेवक मुन्नालाल ने दो दिन पहले घर में फांसी लगाकर आत्म हत्या करने की कोशिश की थी। परिवार वालों ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां अब भी उसका इलाज चल रहा है। परिवार के लोगों ने ही आरोप लगाया था कि 26 माह से मानदेय न मिलने पर रोजगार सेवक ने फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। शासन से इस पर जवाब मांगा गया। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक दिए गए मानदेय का रिकार्ड निकलवाया। उसमें स्पष्ट है कि रोजगार सेवक को वर्ष 2016-17 में 49410 रुपए, 2017-18 में 24000 और वर्ष 2018-19 में 6000 रुपए दिए गए। सीडीओ ने कहा कि रोजगार सेवक को अगर कोई आर्थिक दिक्कत थी तो उसे आकर दफ्तर में बताना चाहिए था। उसकी व्यक्तिगत तौर से मदद की जा सकती थी, लेकिन उसने बीते पूरे साल में 3500 मानव दिवस सृजित कर लोगों को रोजगार देेने के लक्ष्य के विपरीत मात्र 679 मानव दिवस सृजित किए। ग्राम पंचायत में लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं हुआ। इसके अलावा रोजगार सेवक की ब्लाक से अन्य शिकायतें भी आती रहीं। ब्लाक से उसे नौ बार चेतावनी नोटिस भी दिया जा चुका है। सीडीओ ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच की सिफारिश की है, ताकि सही बात सामने आ सकेे।
20 से आंदोलन की चेतावनी
रोजगार सेवक संघ के प्रदेश प्रभारी मनोज शर्मा ने कहा कि शासन से पैसा भेजने के बावजूद स्थानीय स्तर पर रोजगार सेवकों को 26 माह से मानदेय नहीं दिया गया। इसी वजह से रोजगार सेवक को फांसी लगाकर जान देने का कदम उठाना पड़ा। मानदेय न देने के विरोध में रोजगार सेवक संघ 20 मई से आंदोलन करेगा। उसमें जिला स्तर के अलावा अन्य जिलों के पदाधिकारी भी शामिल होंगे।
रोजगार सेवक के फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश पर डीसी मनरेगा समेत कई अधिकारी गांव भेजे गए, ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। उसमें यह निकलकर आया कि मानदेय न मिलना फांसी की वजह नहीं थी। रोजगार सेवक के परिवार की ओर से थाने में भी अब तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। रोजगार सेवक संघ पदाधिकारियों से बातचीत की जाएगी। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ