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मोबाइल एप रोकेगा बच्चों के हेल्थ स्क्रीनिंग में फर्जीवाड़ा

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बरेली। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की समय-समय पर हेल्थ स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग द्वारा होती है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अक्सर इसमें फर्जीवाड़ा कर देती हैं। स्कूलों में बिना जाए ही रिपोर्ट लगा देती हैं, या कह देती हैं कि बच्चे नहीं मिले या स्कूल बंद था। वह अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। शासन ने हेल्थ स्क्रीनिंग में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) नाम से एक मोबाइल एप लांच किया है। बच्चों की फोटो के साथ पूरी रिपोर्ट इसपर अपलोड होगी। ये एप स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, शिक्षा विभाग जिला प्रशासन और शासन के पास होगा। इसी से मॉनिटरिंग की जाएगी। शनिवार से जिला अस्पताल में इसका प्रशिक्षण भी शुरू हो गया।
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दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की टीमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत होने वाले हेल्थ स्क्रीनिंग में फर्जीवाड़ा कर देती हैं। इसके तहत कई तरह की गंभीर बीमारियों की जांच की जाती है। पिछले दिनों शासन तक शिकायतें पहुंची कि टीमें इसमें घपलेबाजी कर रही हैं। कभी स्कूल बंद का बहाना तो कभी फर्जी रिपोर्ट, स्कूल वालों को भी जानकारी नहीं होती थी। अब टीमों को दो दिन पहले स्कूल को बताना होगा कि वह आ रहे हैं। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे और फोटो के साथ पूरी रिपोर्ट मोबाइल एप पर अपलोड कर देंगे। रिपोर्ट अपलोड होते ही उससे जुड़े सभी विभागों को इसका पता चल जाएगा। अगर कोई इसमें फर्जीवाड़ा करता है तो उसको आसानी से ट्रेस किया जा सकता है। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। जिला अस्पताल में शनिवार से इसका प्रशिक्षण भी शुरू हो गया।

शासन ने आरबीएसके नाम से एक मोबाइल एप लांच किया है। स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग की पूरी रिपोर्ट इसी पर अपलोड होगी। स्कूलों को दो दिन पहले ही शेड्यूल भेजना होगा। टीमें जो फर्जीवाड़ा कर देती थीं वो अब नहीं हो पाएगा। इसका प्रशिक्षण भी कराया जा रहा है। लापरवाही पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. अशोक कुमार, एसीएमओ
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