बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दो दिन लगातार आकर चुनावी सभा करने से बढ़ते तापमान के बीच सियासी सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नवाबगंज में पहले दिन के भाषण का अधिकांश हिस्सा दलित प्रेम ओर मुस्लिम गठजोड़ पर प्रहार करने में गुजरा, वहीं फरीदपुर में सीएम ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का नाम तक नहीं लिया। बरेली के फरीदपुर और बदायूं के बिल्सी में दूसरे दिन के भाषण में मुख्यमंत्री ने सपा और क्रांग्रेस को तो निशाने पर रखा लेकिन तीन तलाक का मुद्दा उठाकर मुस्लिम महिलाओं को भाजपा की ओर आने का संदेश भी दिया।
बुधवार दोपहर 12.15 बजे मुख्यमंत्री ने भाषण पहले चरण की आठ लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले के रूझानों में भाजपा की बढ़त के दावे से प्रारंभ किया। फिर बोले- भाजपा 74 प्लस सीटें जीत रही है। इसमें 74 वीं सीट अमेठी की होगी। चंद मिनटों में ही योगी जी विकास की बात पीछे छोड़ आंतरिक और बाह्य सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में मोदी जी के योगदान की याद दिलाकर सीधे राष्ट्रवाद पर आ गए। पीएम आवास, शौचालय, किसान सम्मान, जनधन खाते, मुद्रो लोन, आयुष्मान जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी की तारीफ की। फिर कहा कि पांच साल मोदी जी को और दे दीजिए। भारत में आतंकवाद जड़ से समाप्त हो जाएगा।
राष्ट्रवाद का तड़का लगाते हुए योगी जी ने चीन के डोकलाम विवाद और पुलवामा हमले का जिक्र किया। कहा कि आतंकी जब कांग्रेस सरकार में हमला करते थे तो वह सरकार कुछ नहीं करती थी। केवल निंदा करके मौन हो जाती थी। पाकिस्तान एटम बम की धमकी देता था। भारत की सेना ने न केवल डोकलाम में चीन को रोका, बल्कि पाक अधिकृत बालाकोट और मुजफ्फराबाद में एयर स्ट्राइक कर आतंकियों को घर में घुसकर मारा। अपने 30 मिनट के भाषण में सीएम योगी ने सपा-बसपा और कांग्रेस पर जमकर तीर छोड़े। योगी ने क्षत्रियों का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कांवड़, कुंभ की याद दिलाकर मोदी जी की खातिर वोट देने की अपील की। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से राहत दिलाने की बात कहकर सीएम योगी ने उनको भी संदेश दिया कि मुस्लिम महिलाएं अगर भाजपा को वोट देती हैं तो उनको तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति मिल सकती है, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है। योगी ने मुस्लिम महिलाओं को यह भी संदेश देने की कोशिश की कि मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से भाजपा ही आजादी दे सकती है क्योंकि बाकी दल मौलानाओं के फतवों से डरते हैं। अगर दूसरे दल की सरकार बनी तो वह उनके लिए कुछ नहीं करेंगे। पहली सभा में योगी का दलित-मुस्लिम एकता पर हमला करते हुए मायावती को निशाने पर रखना और दूसरी सभा में उनका नाम तक न लेना बहुत कुछ बयां कर रहा था।