बरेली। सेना और रक्षा भूमि पर होने वाले तमाम मांगलिक आयोजनों पर अब रक्षा मंत्रालय के आदेश से संकट मंडराता दिख रहा है। जारी आदेश के अनुसार अब संबंधित विभाग के अधिकारी बगैर अनुमति आयोजन किए जाने पर संबंधित स्थान पर पहुंचकर ‘रंग में भंग’ डाल सकते हैं। आयोजन में अड़ंगे से बचने के लिए आयोजकों को रक्षा संपदा विभाग से एनओसी लेनी अनिवार्य होगी।
वर्षों से कैंट निवासी रक्षा भूमि और सेना की खाली पड़ी जमीनों पर बगैर अनुमति और निशुल्क आयोजन कराते रहे हैं। बताते हैं कि आयोजन के नाम पर समितियां ठेले, खोमचे, पार्किंग आदि के जरिए मोटी रकम वसूलती रही हैं, जिसकी शिकायतें मंत्रालय पहुंचीं तो एकमुश्त शुल्क अदा कर अनुमति लिए जाने का आदेश जारी हुआ, जिसके चलते नवाबगंज स्थित सैन्य भूमि पर रामलीला मंचन पर संकट आ गया था। आयोजन समिति ने शुल्क अदा कर मंचन कराया। वहीं कैंट के बीआई बाजार में रामलीला मंचन में मेघनाद का पुतला दहन ही नहीं हो सका। अब नए आदेश के अनुसार सेना और रक्षा भूमि की खाली पड़ी जमीन पर टेंट, स्टेज अथवा वैकल्पिक चारदीवारी करने के लिए रक्षा विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेने समेत एकमुश्त शुल्क अदा करना होगा। शुल्क की राशि का आकलन लगाए जाने वाले स्टेज और टेंट के क्षेत्रफल के आधार पर तय होगी। वहीं बगैर टेंट और स्टेज के होने वाले आयोजन निशुल्क संपन्न किए जा सकेंगे। हालांकि इसके लिए रक्षा विभाग और कैंट बोर्ड से अनुमति लेनी अनिवार्य है।
पिछले दिनों रुकवाया आयोजन
करीब छह दिन पहले सदर बाजार की तरफ वृंदावन गेस्ट हाउस के पास खाली पड़ी रक्षा भूमि पर एक वैवाहिक आयोजन के लिए टेंट लगाए जाने की सूचना रक्षा विभाग को मिली। डीईओ प्रमोद कुमार सिंह टीम समेत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बगैर अनुमति लगाए जा रहे टेंट व अन्य व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए आयोजन को बंद करवा दिया। डीईओ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मंत्रालय के आदेशानुसार किसी भी आयोजन के लिए एनओसी लेनी अनिवार्य है। साथ ही नियमानुसार शुल्क अदा करने के बाद ही आयोजन कराए जा सकेंगे।