बरेली। नए और डुप्लीकेट वोटर आईडी कार्ड पाने के लिए पूरे दिन लोग निर्वाचन कार्यालय और तहसील में चक्कर लगाते घूम रहे हैं। इसे लेकर निर्वाचन से जुड़े अफसर गंभीर भले न हों लेकिन उन्हेें चुनाव से संबंधित सामग्री सप्लाई, प्रकाशन आदि के टेंडर कराने में जरूर व्यस्त दिखे। जल्दबाजी में वह ये भी भूल गए कि दस लाख रुपये से ऊपर के टेंडर सीधे नहीं होते हैं इसके लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है। चुनाव आचार संहिता इस समय लगी है इसलिए कोई शिकायत भी नहीं करेगा और न ही कोई नेता पंगा लेगा। ऐसे में मतदाता निर्देशिका और वोटर पर्ची छपवाने के लिए नियम विरुद्ध टेंडर जारी कर दिए। हालांकि, मंडल के अन्य जिलोें ने ई-टेंडरिंग ही अपनाई है। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है।
निर्वाचन आयोग अधिक से अधिक मतदान कराने और सही स्थान पर वोट होने के लिए कई कवायद करता है। इसके तहत मतदाताओं के घरों तक वोटर गाइड और सहायता पुस्तिका भी पहुंचाई जाती है। आयोग प्रति चार-पांच वोटर पर एक पुस्तिका करा रहा है। यह बहुरंगी पुस्तिकाएं हर जिले स्तर पर प्रकाशित हुईं हैं उसका वितरण भी बीएलओ द्वारा वोटर पर्ची के साथ पहुंचाया जाना है। यह सामग्री जिले में 15 अप्रैल तक उपलब्ध होनी है। बरेली जिले में करीब 8 हजार पुस्तिकाएं और 32 लाख पर्चियां प्रकाशित होनी हैं। वोटर गाइड पर करीब चालीस लाख रुपया खर्चा आ रहा है। जबकि पर्चियों पर क रीब 20-22 लाख रुपया खर्चा बताया जाता है। प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही सभी विभागों में ई-टेंडरिंग व्यवस्था सख्ती से लागू कर दी गई। इसके तहत दस लाख रुपये से अधिक के टेंडर करना वित्तीय अनियमितता मानी जाएगी। लेकिन यहां इन नियमों को दरकिनार करते हुए सीधे टेंडर हो गए। बताते हैं कि इस टेंडर घोटाले में एक-दो फर्में शामिल बताई जाती हैं।