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राशन माफिया और ट्रक ड्राइवर पर एफआईआर

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नवाबगंज/बरेली। नवाबगंज में राशन माफिया के गोदाम पर उतारा गया सरकारी राशन ललौरीखेड़ा (पीलीभीत) के एफसीआई गोदाम से लाया गया था। पहले इसे मुर्गी दाना बताया गया था लेकिन शनिवार को जांच टीम ने भी इसकी पुष्टि कर दी। इसके बाद डीएम के निर्देश पर थाना नवाबगंज में राशन माफिया और ट्रक ड्राइवर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज करा दी गई है। हालांकि जांच टीम ने सरकारी राशन ढोने वाले ठेकेदार समेत अन्य लोगोें पर कोई कार्रवाई नहीं की, न इस बिंदु पर जांच ही की।
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बुधवार दोपहर पीलीभीत हाइवे पर गांव गरगईया में सरकार चावल के बोरे उतारकर निजी गोदाम रखे जा रहे थे। कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर अगले दिन वायरल कर दिया था। वीडियो वायरल होने से एक बार फिर बरेली और आसपास जिलों में गरीबों के राशन की कालाबाजारी का खुलासा हो गया। अमर उजाला ने वीडियो वायरल से संबंधित खबर प्रमुखता से छापी तो प्रशासन सक्रिय हुआ। एसडीएम नवाबगंज ने इसकी जांच के लिए एक टीम बना दी। जांच रिपोर्ट आते ही डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति दे दी। इसके बाद पूर्ति निरीक्षक पशुपति देव ने शनिवार शाम थाना नवाबगंज में अज्ञात ट्रक चालक और गरगईया निवासी कदीर पर एफआईआर दर्ज कराई है।

ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार पर मेहरबानी
नवाबगंज पीलीभीत हाइवे स्थित गरगईया गांव में उतारा गया सरकारी चावल ट्रकों से उतारा गया था। यह सब वायरल हुए वीडियो में साफ दिख रहा है। एक वाहन पर संपर्क नंबर 98370- 87704 साफ लिखा दिख रहा है, लेकिन जांच टीम ने इस मोबाइल नंबर पर संपर्क करना उचित नहीं समझा। जबकि टीम ने वाहन चालक अज्ञात बता दिया।
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एफसीआई गोदाम से आया था चावल
यह चावल पीलीभीत के ललौरीखेड़ा एफसीआई गोदाम से रेलवे मालगोदाम ले जाया जा रहा था। रास्ते में राशन माफिया से मिलीभगत के तहत इसे उसके गोदाम में उतार दिया गया। जांच टीम ने गरगईयां में जो ब्रोकन चावल पाया था, उसे मुर्गी दाना बता दिया था। लेकिन असलियत में यही ब्रोकन चावल मुर्गी दाना के लिए इस्तेमाल होता है। वास्तव में माफिया रास्ते में बोरे में भरे चावल में यही मुर्गी दाना मिलाते हैं। साथ ही एक-दो किलो चावल कम कर देते हैं। यही खराब टूटा और खराब मुर्गी दाना राशन दुकानों पर पहुंचता है और चावल बताकर गरीबों को तीन रुपये किलो बेचा जाता है। यानी राशन हेराफेरी और कालाबाजारी खेल में एफसीआई अफसर सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि ललौरी खेड़ा पहले से ही सुर्खियों में रहा चुका है। चावल बदलने में पांच रुपये प्रति बचत होती है। एफसीआई रिकार्ड में रोड ट्रांसपोर्ट कांट्रैक्टर (आरटीसी) में डीकेएसटीसी दर्ज है और फर्म प्रमुख दिपेश अग्रवाल बताए जाते हैं। जांच टीम यहां तक क्यों नहीं पहुंची, इसकी चर्चा बनी हुई है।

एसडीएम ने जांच टीम बनायी थी, रिपोर्ट आने पर डीएम कार्यालय से 3/7 धारा में मामला दर्ज कराने की अनुमति मिली। इसके बाद पूर्ति निरीक्षक ने एफआईआर दर्ज कराई गई।
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- सीमा त्रिपाठी, डीएसओ
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