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जिम में शरीर बनाते हुए बिगड़ न जाये सेहत

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जिम में बॉडी बनाने की चाहत
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कहीं बिगाड़ न दे सेहत
फोटो ---

- अधिक लोगों के बंद परिसर में कसरत करने से होता है हानिकारक गैसों का उत्सर्जन
- फेफड़ों का संक्रमण की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। संतुलित शरीर की चाहत में जिम में कसरत करते हुए सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना और बोझिल महसूस होने को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है। आर्थोपेडिक डॉ. ब्रजेश्वर सिंह का कहना है कि हाल ही में प्रकाशित एक मेडिकल जर्नल के मुताबिक बंद वातावरण में कसरत करने के दौरान फॉमल्डिहाइड गैस, कार्बन डाई ऑक्साइड, वॉलटिल ऑर्गेनिक कंपाउंड उत्सर्जित होते हैं। यह मानव शरीर के लिए खतरनाक होते हैं। इनसे फेफड़ों का संक्रमण हो सकता है। जबकि लोग इसे कसरत से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह बंद वातावरण में अधिक लोगों के एक साथ कसरत करने से होता है।

ज्यादा लोगों के मशीनों को छूने से होता संक्रमण
अधिकांश जिमों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होता, जिससे बाहर की हवा नहीं मिल पाती। मशीनों और वजन को एक से अधिक व्यक्ति के छूने से संक्रमण होता है।

खुले में कसरत से ज्यादा फायदा
डॉक्टर सुझाव देते हैं कि खुले में स्वच्छ हवा में की गई कसरत ज्यादा फायदेमंद है। हालांकि जिम में गुणवत्ता वाले एयर फिल्टर और नियमित सफाई से मदद मिल सकती है। यहां भी सफाई के लिए जहरीले केमिकल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
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इन बीमारियों का होता है खतरा --
- फेफड़ों का संक्रमण
- त्वचा का संक्रमण
- न्यूरोटोक्सिस (नसों का शिथिल हो जाना)
- हेपाटोक्सिस (लीवर की बीमारी)

वर्जन
जिम में कसरत करने वालों को वहां के वातावरण पर खास ध्यान देना चाहिए। यह लापरवाही बीमारियों को दावत दे सकती है। खुले वातावरण में वर्कआउट करना ज्यादा सेहतमंद हो सकता है। - डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, आर्थोपेडिक सर्जन
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