आयकर कर्मचारी और अधिकारियों ने संयुक्त रूप से अपनी मांगों को लेकर दीर्घकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। सोमवार को आयकर भवन परिसर में सभा कर संगठन ने विभागीय सर्वे, छापा, सर्च आदि प्रवर्तन कार्रवाई से दूर रहने और स्थापना दिवस भी न मनाने का फैसला किया है।
ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (जेसीए) के बैनर तले आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की मनमानी और उपेक्षा के चलते पदोन्नति और वेतन विसंगति मामले लंबित हैं। जेसीए सहसंयोजक व जोनल सचिव आयकर कर्मचारी संघ रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान प्रत्यक्ष कर दस लाख करोड़ राजस्व आया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बावजूद लंबित मांगें पूरी नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि लंबे समय से विभागीय पदोन्नति और खाली पदों पर नियुक्तियां प्रभावित हैं। वेतन और अन्य मामले भी तय नहीं हो पा रहे हैं, इससे कर्मचारी और राजपत्रित अधिकारियों में आक्रोश बना हुआ है।
जोनल सचिव ने बताया कि कर्मचारी पहली अगस्त से विभागीय सर्वे, छापा और सर्च आदि प्रवर्तन कार्रवाई में भागीदारी नहीं करेंगे और 24 जुलाई को प्रस्तावित स्थापना दिवस से भी दूर रहेंगे। लंबित मांगें पूरी नहीं होने पर 12 सितंबर को एक दिवसीय हड़ताल होगी। सभा में राजेश कुमार, संत प्रकाश, पीके आर्य, देवी दयाल, प्रमोद रावत, बीडी प्रजापति, राजीव मिश्रा आदि ने विचार रखे।