मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन पर ज्यादा देर तक आंखें गड़ाए रखने से युवाओं और बच्चों की आंखों का पानी सूख रहा है। कंप्यूटर गेम, टीवी शो को लगातार बिना पलक झपकाये देखने वाले बच्चों से लेकर आईटी और बैंक समेत निजी सेक्टर में कामकाजी लोग सबसे ज्यादा इसका शिकार हो रहे हैं। गर्मियों में ड्राई आई की समस्या दोगुनी बढ़ जाती है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 250 से 300 मरीज सिर्फ आंख की बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार के मुताबिक ओपीडी में आने वाले 70 फीसदी लोग आंखों में चुभन और किरकिराहट की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। जांच में ड्राई आई की समस्या सामने आती है। 25 से 40 साल के युवा और बच्चों में भी यह समस्या सामने आ रही है। डॉक्टर का मानना है कि बीते पांच सालों में बड़े स्क्रीन वाले स्मार्टफोन का चलन बढ़ने से बीमारी में इजाफा हुआ है।
बीस-बीस-बीस का फार्मूला बचाएगा
डॉ. अक्षय गुप्ता के मुताबिक ड्राई आई की समस्या में बीस-बीस-बीस का फार्मूला काम करता है। कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल के स्क्रीन पर 20 मिनट तक लगातार देखने के बाद 20 मीटर की दूरी पर 20 सेकेंड तक देखना चाहिए। इससे बीमारी होने की आशंका कम हो जाती है। हरे पेड़ पौधों को देखने से भी आंखों को राहत मिलती है।
एक मिनट में 15 बार झपकें पलक
डॉ. अक्षत बास के मुताबिक अमूमन एक मिनट में दस से पंद्रह बार पलकें झपकनी चाहिए। इससे कॉर्निया में तरलता बनी रहती है। मोबाइल या कंप्यूटर पर काम करते हुए लोग पलके नहीं झपकते हैं। इससे आंखों में पानी कम बनता है। यही वजह है कि ड्राई आई की समस्या पैदा होती है।
यह हैं लक्षण -
आंखों में चुभन या जलन होना
नींद पूरी होने पर भी आंखों में भारीपन रहना
इस तरह करें बचाव -
मोबाइल या कंप्यूटर पर काम करते हुए एक मिनट में कम से कम बारह से पंद्रह बार पलकें झपकाएं
अंधेरे में मोबाइल स्क्रीन लंबे समय तक न देखें
काम करते हुए 20 मिनट के बाद स्क्रीन से नजर हटाकर 20 सेकेंड तक दीवार या कुछ और देखें