भाजपा सरकार की मरीजों को सस्ती दवायें उपलब्ध कराने की कोशिशों पर दवा कंपनियां पानी फेर रही हैं। मौजूदा समय में ड्रग प्राइज कंट्रोल आर्डर (डीपीसीओ) के अंतर्गत आने वाली कई दवायें या तो गायब हो गई है, या फिर ढूंढे नहीं मिल रही। दवा कारोबारियों की माने तो गंभीर बीमारियों में कारगर और बेहद सस्ती दवाओं का उत्पादन कंपनियां जरूरत से काफी कम कर रही है। जिससे इन दवाओं की बाजार में किल्लत हो गई है।
दिल की बीमारी का इंजेक्शन पेनीड्योर, पेशाब रुकने पर दिया जाने वाला इंजेक्शन लेसिक्स, एलर्जी होने पर दी जाने वाली ग्राइसोविन टेबलेट इन दिनों बाजार में नहीं है। केमिस्टों की माने तो उम्दा सॉल्ट वाली इन दवाओं का दूसरा विकल्प नहीं है। दवा व्यवसायियों के मुताबिक ये दवायें बेहद सस्ती होती है। कंपनी ने मुनाफा कम होने के कारण इनका उत्पादन कम कर दिया है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इसी क्रम में एंटी बॉयोटिक सेप्ट्रान और कोढ़ में दी जाने वाली दवा डेपसोन भी शॉर्ट चल रही हैं।