पशुपालन करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा खर्चा चारे पर ही करना पड़ता है। चारा उगाने में काफी मेहनत भी होती है। पर अब किसानों को पूरे साल चारा उगाने की टेंशन नहीं होगी।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने पशुओं को पूरे साल पौष्टिक एवं हारा चारा मिल सके इसलिए जिजुवा घास उगाई है। अच्छी बात यह है कि गाय, भैंस, बकरी समेत सभी पशु इसको बड़े चाव से खाते हैं। पशु पालन करने वाले किसान और डेयरी संचालकों के लिए यह घास काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने फार्मर फर्स्ट योजना के तहत आंवला क्षेत्र के कुछ किसानों को यह घास दी है।
गुजरात की जिजुवा घास उत्तर भारत की जलवायु में भी आसानी से उगाई जा सकती है। अन्य घास के मुकाबले इसमें ज्यादा प्रोटीन होता है। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रणवीर सिंह के अनुसार द्वारिका राजकोट में उगने वाली जिजुआ घास का बंशी गौशाला अहमदाबाद के संचालक गोपाल भाई सुतालिया ने काफी समय तक परीक्षण किया है। एक स्थान पर जिजुवा समेत कई किस्म की घास उगाईं और दुधारू पशुओं को खुला छोड़ दिया। पशुओं ने जिजुवा को ज्यादा चाव से खाया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घास मीठी होती है, जिस कारण पशु इसे ज्यादा पसंद करते हैं। साल में इसको एक बार बोना पड़ता है और किसान पूरे साल इसका फायदा ले सकता है।
किसानों को दी जिजुवा घास
फार्मर फर्स्ट योजना के तहत आईवीआरआई की ओर से आंवला के अतरछेड़ी, निसोही, इस्लाइलपुर ग्राम पंचायतों के चयनित किसानों को यह घास उपलब्ध कराई है। पशु पालन करने वाले किसान कम खर्चे पर अपने पशुओं के लिए चारा उगा सकते हैं। वैसे चारा के लिए कई बार फसल उगानी पड़ती है। बाजरा, बरसीम, चरी या अन्य कोई चारे के लिए बार-बार बुआई करनी पड़ती है, पर जिजुवा घास एक बार ही बोनी पड़ती है। सबसे अच्छी बात है यह कि इस घास को खेतों की मेड़ पर और उचित पानी निकास वाली भूमि पर भी उगा सकते हैं।
जुलाई में कर सकते हैं इसकी बुआई
वैज्ञानिक बताते हैं कि जुलाई में इसकी रूट स्लिप बो सकते हैं। दिसंबर और जनवरी में इसकी बढ़वार कम होती है, पर बाकी दिनों में अच्छी बढ़वार होती है। उगाने में केमिकल और फर्टिलाइजर की भी जरूरत नहीं होती है। डॉ. रणवीर बताते हैं कि कई किसान इस घास को उगा चुके हैं और अच्छे परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने पीलीभीत के बिलसंडा ब्लॉक के भदेहीखजा गांव के श्वेतांश सिंह किसान का उदाहरण दिया। बताया कि उन्होंने चौथाई बीघा में जिजुवा घास बोई। चारे के बजाए वह अपनी 21 गायों को यही घास खिलाते हैं। अन्य चारे की तुलना में इसको मशीन से काटना भी आसान है।