बरेली। रक्तदान महादान है। रक्तदाताओं ने इसे साबित कर दिखाया है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने महादानियों से जुटाए रक्त से सालभर में 899 बेसहारा मरीजों, गर्भवतियों, दुर्घटनाग्रस्त व थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों की जान बचाई है।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. केपी सिंह के मुताबिक इमरजेंसी में भर्ती होने वाले ऐसे दुर्घटनाग्रस्त व गंभीर रोगों से ग्रसित मरीज जिनके पास रक्तदाता नहीं होते हैं, उनको निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली एनीमिक गर्भवतियों को भी निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को भी निशुल्क रक्त चढ़ाते हैं। निजी अस्पतालों में भर्ती जरूरतमंद मरीजों को भी जिला अस्पताल की एडी एसआईसी की संस्तुति पर निर्धारित राशि के भुगतान पर ब्लड बैंक द्वारा रक्त मुहैया कराया जाता है। सालभर में ऐसे ही 899 मरीजों को रक्त देकर उनकी जान बचाई गई।
आंकड़ों पर गौर करें तो ब्लड बैंक में अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक 3,064 यूनिट रक्त जुटाया गया। इनमें से 899 यूनिट रक्त बगैर डोनर दिया गया। वर्ष 2023 में अप्रैल में 31, मई में 26, जून में 60, जुलाई में 78, अगस्त में 195, सितंबर में 79, अक्तूबर में 74, नवंबर में 65, दिसंबर में 69, वर्ष 2024 में जनवरी में 84, फरवरी में 68, मार्च में 70 यूनिट रक्त मरीजों को बगैर रक्तदाता निशुल्क मुहैया कराया गया।
114 लोगों को पता चलीं बीमारियां
ब्लड बैंक के पीआरओ मनोज कुमार के मुताबिक रक्तदान के पूर्व और बाद में प्राप्त रक्त की सभी जरूरी जांचें होती हैं। आंकड़ों के अनुसार जुटाए गए 3,064 यूनिट रक्त की जांच में 114 लोग गंभीर रोगों की चपेट में मिले। ब्लड बैंक की ओर से कॉल कर उन्हें समय पर इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने इलाज शुरू कराया। इसमें 28 यूनिट रक्त हेपेटाइटिस बी, 49 यूनिट रक्त हेपेटाइटिस सी, 37 यूनिट रक्त वीडीआरएल यानी सिफलिस से संक्रमित मिला था।
केस-1 : भमोरा की गर्भवती प्रसव के लिए महिला अस्पताल में भर्ती हुईं। जांच में एनिमिक मिलीं। ओ निगेटिव रक्त ग्रुप खत्म हो गया था। ब्लड बैंक ने जिला अस्पताल के कर्मचारी संजीव शर्मा से संपर्क कर रक्तदान कराया। जरूरी जांच के बाद गर्भवती को रक्त चढ़ाया गया। सुरक्षित प्रसव हुआ।
केस-2 : शाहजहांपुर रोड पर गंभीर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती हुआ। रक्त काफी बह गया था। ओ पॉजिटिव रक्त की जरूरत थी। ब्लड बैंक में आठ यूनिट रक्त उपलब्ध था। कोई परिजन साथ न होने पर उसे रक्त चढ़ाया गया। तब उसकी जान बच सकी।
केस-3 : नवाबगंज की बुजुर्ग महिला डेंगू की चपेट में थीं। एनीमिक थीं और उन्हें प्लेटलेट्स की भी जरूरत थी। साथ आए परिजन को भी बुखार था। वह रक्तदान में अक्षम थे। ब्लड बैंक ने बी पॉजिटिव रक्त के साथ इसी रक्त ग्रुप के प्लेटलेट्स भी निशुल्क दिए। तब उनकी जान बची।
केस-4 : कटरा चांद खां के कैंसर पीड़ित बुजुर्ग निजी अस्पताल में भर्ती थे। एबी पॉजिटिव रक्त चढ़ना था। बेटे ने एक यूनिट रक्त पूर्व में दिया था। नियमानुसार अब वह तीन माह बाद ही रक्त दे सकते थे। बेटे के प्रार्थना पत्र पर एडी एसआईसी की संस्तुति के बाद निर्धारित शुल्क जमा कराकर रक्त दिया गया।