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85 साल के बुजुर्ग को नहीं पा रहा राशन

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रमाकांति - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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किला छावनी की 85 साल की रमाकांति का मशीन में अंगूठा न लग पाने से कोटेदार ने वापस लौटाया

बरेली। लॉकडाउन में बड़ी संख्या में गरीब बुजुर्ग कोटे की दुकान से राशन पाने के लिए दौड़ ही लगाते रहे गए, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। वजह ये है कि अंगूठे की लकीरें मिट जाने के कारण बायोमीट्रिक मशीन में अगूंठा पंच नहीं हो पा रहा है। कोटेदार से लेकर अधिकारियों तक दौड़ लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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किला छावनी होली चौराह मस्जिद वाली गली में रहने वाली करीब 85 वर्षीय रमाकांति के पति को गुजरे काफी समय हो गया। कार्ड पर अकेला उनका ही नाम चढ़ा है। कोटे की दुकान पर पहले पांच किलो राशन मिलता था, लेकिन कई महीने से कोटेदार राशन ही नहीं दे रहा। बायोमीट्रिक मशीन पर उनका अंगूठा ही नहीं लग पा रहा है।

कार्ड पर ऐसी राइटिंग की कुछ समझ में न आए

कार्डधारकों को कितनी मात्रा और किस रेट पर गेहूं-चावल का वितरण हुआ है, इसके छिपाने के लिए तमाम कोटेदार कार्डों पर ऐसी राइटिंग लिखते हैं कि कुछ समय में ही न आए। बड़ी संख्या में उपभोक्ता कोटेदारों पर कम राशन देने के साथ ज्यादा दाम वसूलने की शिकायत कर चुके हैं।
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