बरेली। शहर में 833 अवैध डेयरियां संचालित हो रही हैं। गोबर से नाले चोक हो रहे हैं, जबकि सड़कों पर घूम रहे पशु यातायात को बाधित कर रहे हैं। ये महिलाओं, बच्चों व पुरुषों पर हमला कर उनको जख्मी भी कर रहे हैं। नगर निगम की तरफ से जुर्माना लगाया जाता है, लेकिन डेयरी संचालकों पर इसका ज्यादा असर नहीं होता।
नगर निगम क्षेत्र में सर्वाधिक डेयरियां बानखाना, साहूकारा, मढ़ीनाथ और पुराने शहर में हैं। साहूकारा में तीन बड़ी डेयरियां हैं, प्रत्येक में 500 से 700 भैसें हैं। शहर की सभी 833 डेयरियाें में 80 हजार से अधिक गाय व भैंस हैं। डेयरी संचालक पशुओं को मोहल्ले में खुला छोड़ देते हैं। इससे आने-जाने वाले लोगों पर खतरा मंडराता रहता है।
नगर निगम की टीम पशुओं को पकड़ने पहुंचती है तो डेयरी संचालकों को पहले ही भनक लग जाती है। नतीजा, वे सजग हो जाते हैं और अपने पशुओं को बांध लेते हैं। इन डेयरियों में दो-तीन सबमर्सिबल पंप लगाकर पानी की बौछार से गोबर को नालों में बहाया जाता है। इससे नाले चोक हो जाते हैं और बारिश होने पर पूरी गली में जलभराव हो जाता है। निगम की तरफ से ठोस कार्रवाई न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हाईकोर्ट के आदेश का भी नहीं हो रहा पालन
हाईकोर्ट का आदेश है कि डेयरियों को शहर की सीमा के बाहर किया जाए। इसमें बरेली विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जिला पंचायत को मदद करनी है। बावजूद आज तक इनको भूमि ही नहीं मिल सकी।
डेढ़ साल में वसूला गया 16.87 लाख जुर्माना
नगर निगम की तरफ से चालान के नाम पर 250 डेयरियों से वर्ष 2025-26 में 13.94 लाख जुर्माना वसूला गया। इस वित्त वर्ष में अब तक 50 डेयरियों का चालान करते हुए 2.93 का जुर्माना वसूला गया। इन पर पांच हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाता है।
वर्जन
शहर में डेयरियां अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। गोबर नाले में बहाने पर और पशुओं को छोड़ने पर जुर्माना लगाया जाता है। आगे भी अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। डेयरियों को स्थानांतरित करने के लिए शहर के बाहर भूमि की तलाश है, लेकिन मिल नहीं पा रही है। - डाॅ. भानु प्रकाश, नगर स्वास्थ्य अधिकारी