बरेली। बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के दावे पर डॉक्टरों की कमी भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल में एक डॉक्टर पर हर दिन दो सौ से ज्यादा मरीजों की जिम्मेदारी है। कतार से बचने के लिए मरीज झोलाछाप के पास पहुंचकर इलाज कराने के लिए मजबूर है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक स्वीकृत 230 पदों के सापेक्ष महज 148 विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती है। इसमें आधिकारिक पद भी शामिल हैं, जो प्रशासनिक दायित्व के चलते ओपीडी नहीं कर पा रहे। ऐसे में 148 चिकित्सकों पर ही जिले की करीब 50 लाख की आबादी को बेहतर चिकित्सा सेवा मुहैया कराने की जिम्मेदारी है। रिकॉर्ड के मुताबिक जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में हर दिन करीब दस हजार मरीज पहुंच रहे हैं। कई स्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम, पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती है। ऐसे में डॉक्टर न होने पर मरीज वहां टिकते नहीं। सही इलाज न मिलने से रोग बढ़ने से मरीजों की जान का संकट भी रहता है।
परामर्श के बाद ही लें दवाएं
जिला अस्पताल के डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक बगैर परामर्श दवा के सेवन से हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने की आशंका रहती है। बताया कि बाजार में कई ब्रांड की दवाएं मौजूद हैं। कई में मिश्रित दवा भी होती है। परामर्श न होने से गैरजरूरी साल्ट के सेवन से दुष्प्रभाव की आशंका रहती है। वहीं, बगैर जरूरत के एंटीबायोटिक दवा का सेवन भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है।
इन बातों का रखें ध्यान...
- बगैर चिकित्सकीय परामर्श के पैरासिटामाॅल के अलावा अन्य दवा का सेवन न करें।
- कुत्ता, बिल्ली, चूहा, छछूंदर व अन्य जानवर के काटने पर रैबीज वैक्सीन लगवाएं।
- शून्य से पांच साल के बच्चों का टीकाकरण और गर्भवती की नियमित जांच जरूरी।
- भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क लगाकर रखें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- घर के आसपास, पुराने बर्तन, कूलर और पुराने टायर में पानी न भरने दें।
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, बुखार, बलगम में खून आने पर कराएं टीबी की जांच।
- मलेरिया, डेंगू अन्य संक्रामक रोग की चपेट में आने पर मरीज खुद करें आइसोलेट।
- मुंह, शरीर में गांठ, त्वचा रंग बदलने, आंख में दर्द और पानी निकलने पर कराएं जांच।
एक नजर में
- 50 लाख है जिले की आबादी
- 02 रेडियोलॉजिस्ट है तैनात
- 16 के सापेक्ष छह महिला चिकित्सक महिला अस्पताल में तैनात
- 43 के सापेक्ष 28 चिकित्सक जिला अस्पताल में तैनात