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टॉपर्स को नहीं भायी इंटरनेट की पढ़ाई

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बरेली। इंटरनेट के दौर में पढ़ाई के साधनों की कमी नहीं रह गई है। तमाम ऐसे एप्स भी इंटरनेट पर उपलब्ध हैं जो जो तर्क शक्ति यानी माइंड पॉवर बढ़ाने का दावा करते हैं। मगर सीबीएसई में टॉ़प करने वाले मेधावियों ने ऐसे एप्स को नकार दिया है। उनके मुताबिक इंटरनेट की पढ़ाई आसान नहीं बल्कि बेहद टफ होती है। एक सवाल का जवाब खोजने में ही अच्छा-खासा समय लग जाता है। पढ़ाई तो हो नहीं पाती, उल्टे इंटरनेट सिरदर्द और आंखों में जलन की वजह बन जाता है। टॉपर्स का कहना है कि उनकी नजर में कभी कोई ऐसा स्टूडेंट नहीं आया जिसने सोशल मीडिया का उपयोग करके अच्छे अंक हासिल किए हों।
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मंडल में टॉप करने वाली ज्योति सिंह कहती हैं कि उन्होंने परीक्षा से तीन महीने पहले ही सोशल साइट्स से दूरी बना ली। व्हाट्सएप का प्रयोग भी सिर्फ नोट्स के लिए किया। जिले की सेकंड टॉपर हितांशी का भी कहना है कि उन्होंने एग्जाम के महीने भर पहले से ही स्मार्टफोन पास रखना बंद कर दिया था। सोशल साइट्स पर आने वाले मेसेज समय खराब करते थे।
जिले की सेकेंड टॉपर कशिश बताती हैं कि उन्होंने तो आज तक फोन ही नहीं लिया है। कभी जरूरत होने पर मम्मी-पापा का फोन का इस्तेमाल कर लेती थीं, लेकिन अब फोन उन्हें गिफ्ट में मिलेगा। जिले के थर्ड टॉपर माणिक्य कहते हैं कि जब आठवीं में थे तो फेसबुक पर आईडी बनाई थी, मगर कुछ ही दिन में समझ में आ गया कि यह समय की बर्बादी का खेल है और फिर कभी एकाउंट खोला ही नहीं। महर्षि विद्या मंदिर के टॉपर सूर्यांश माहेश्वरी कहते हैं कि अच्छी पढ़ाई सिर्फ किताबों से होती है। नेट या एप्स पर पढ़ना बेहद कठिन है। कपिल पटेल, मोहन सक्सेना ने भी उनकी बात का समर्थन किया है।
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