बरेली। मई की छुट्टियों में अगर देहरादून, मसूरी, हरिद्वार घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इस बार आपका सफर मुश्किल भरा हो सकता है। रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद मुरादाबाद मंडल 350 किलामीटर के दायरे में पटरियां बदलने के मेगा ब्लॉक लेने की तैयारी कर रहा है। इस मेगा ब्लॉक में यह रेलखंड भी शामिल है। वहीं, इस रूट का सड़क मार्ग भी बहुत अच्छा नहीं है। जगह-जगह सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे आपकी मौजमस्ती का सफर कष्टदायक बना सकते हैं।
मुरादाबाद डिवीजन में पटरियों की लंबाई 1406 किलोमीटर है। एक साल में 75 प्रतिशत हिस्से की पटरियां और स्लीपर बदले जा चुके हैं। बाकी काम फरवरी से होना था, लेकिन रेलवे बोर्ड ने होली और अन्य त्योहारों की वजह से ब्लॉक देने से मना कर दिया था। हालांकि रायबरेली स्टेशन पर इंटरलॉकिंग के चलते कई ट्रेनों को होली पर भी रद्द कर दिया गया था।
जानकारी के मुताबिक, इंजीनियरिंग अनुभाग मई से मेगा ब्लॉक लेना शुरू करेगा। मुरादाबाद मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि डिवीजन में 350 किलोमीटर की पटरियां बदलनी शेष हैं। इसके बाद 60 किलो की पटरी बिछाने का काम पूरा हो जाएगा। पटरियां बदलने के लिए यह मेगा ब्लॉक हरिद्वार, देहरादून, जम्मू, अमृतसर की ओर लिया जाएगा। इसके चलते सैलानियों को परेशानी होगी। बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा दिक्कत हरिद्वार और देहरादून जाने वाले यात्रियों को रहेगी। कारण, दून एक्सप्रेस में मई-जून के लिए अभी से टिकट नहीं मिल रहे हैं। अगर टिकट मिल भी गया है तो मेगा ब्लॉक के दौरान उसका संचालन कैसे होगा, यह कहना भी मुश्किल है।
ब्लॉक लिया, पर नहीं बदलीं पटरियां
अभी कुछ दिन पहले इंजीनियरिंग अनुभाग ने बरेली जंक्शन पर प्लेटफार्म दो की पटरियों को अनफिट देकर ब्लॉक ले लिया। टीम ने पटरियों की मरम्मत नहीं की, लेकिन ट्रेनें भी नहीं गुजारी गईं। इस मामले को लेकर मंडलीय अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
रोडवेज की फिलहाल कोई प्लानिंग नहीं
छुट्टियों के दौरान देहरादून-मसूरी को रोडवेज से सफर करने को लेकर भी अभी कोई प्लानिंग नहीं की जा सकती। बरेली से देहरादून के लिए सिर्फ एक एसी बस है। साधारण बसें हरिद्वार तक हैं लेकिन सड़क की स्थिति बहुत खराब है। ऐसे में सड़क मार्ग से अगर यात्रा का प्लान बना रहे हैं और पीठ दर्द के लिए भी तैयार रहें।
लखनऊ-दिल्ली हाइवे भी क्षतिग्रस्त
गड्ढे और जाम भरा, लखनऊ-बरेली का सफर
बरेली-सीतापुर फोरलेन का 157 किलोमीटर का सफर कष्ट देने के साथ ही अधूरा निर्माण खतरा बना हुआ है। इसके अलावा जगह-जगह जाम लगने से बरेली से लखनऊ पहुंचने में तीन से चार घंटे का वक्त ज्यादा लग रहा है। एनएचएआई ने वर्ष 2011 में करीब 27 सौ करोड़ से इस हाईवे का निर्माण शुरू कराया था। मगर, इसका काम लेने वाली कंपनी इरा इंफ्रास्ट्रक्चर बैंकों से अरबों का कर्ज लेकर फरार हो गई। फरीदपुर, फतेहगंज पूर्वी, कटरा और उसके आगे हाईवे क्षतिग्रस्त है। कई जगह तो डिवाइडर के एक साइड की रोड ही नहीं बनाई गई है। इसके चलते कई बड़े हादसे भी हो चुके हैं। कुछ जगह रेलवे ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के काम अधूरे हैं। इसके कारण कई जगह लंबा जाम रहता है। मगर, अधिकारियों ने इस हाईवे को दुरुस्त करने के लिए दोबारा टेंडर ही नहीं किया है।
मुरादाबाद से गाजियाबाद के बीच पिलखुआ पुल निर्माण से जाम
बरेली से दिल्ली के बीच हापुड़ और गाजियाबाद के बीच पिलखुवा में पुल निर्माण करीब दो साल से चल रहा है। यह काम भी एनएचएआई करा रही है लेकिन रफ्तार काफी कम है। किसी त्योहार या खास मौके पर दिल्ली-बरेली के बीच इस हाईवे पर जब ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है तो पिलखुवा में कई-कई घंटे लंबा जमा लगा रहता है। इससे बरेली से दिल्ली जाने के लिए लोगों का काफी समय बर्बाद हो जाता है। होली के दौरान भी पिलखुवा में जाम के कारण लोगों को खासा परेशान होना पड़ा था।