बरेली। स्किल इंडिया प्रोग्राम के जरिये युवाओं को रोजगार मुहैया कराने की सरकार की पहल कागजों पर भले ही कारगर दिख रही हो, लेकिन बजट के अभाव में कई जगह योजना दम तोड़ रही है। इसका ताजा उदाहरण है कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल शुरू हुआ इंक्यूबेशन सेंटर। सेंटर के लिए शासन से पचास लाख की ग्रांट तो स्वीकृत हुई, लेकिन बजट अब तक नहीं आया। ऐसे में यह सेंटर अधर में लटक गया है।
इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के नये आइडिया को कॉमर्शियल रूप देने के लिए शासन की मदद से इंक्यूबेशन सेंटर बना। इसमें इंजीनियरिंग के अलावा बाकी विद्यार्थी भी स्टार्ट-अप पर काम कर सकते हैं। शासन से पचास लाख की ग्रांट स्वीकृत हुई। इतना ही पैसा तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टेकिप) के तहत विश्वविद्यालय को लगाना था। इस सेंटर पर छात्रों को हाईटेक लैब, विशेषज्ञों के दिशा-निर्देश, सेमिनार, वर्कशॉप आदि सुविधाएं मिलतीं। इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से पहली किस्त के रूप में 12 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। करीब छह महीने बीत गए, लेकिन ग्रांट नहीं मिली। शासन की ढिलाई देख विश्वविद्यालय ने भी ग्रांट जारी नहीं की। इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के प्रस्ताव आने थे, लेकिन सेंटर पर कोई काम शुरू न होने की वजह से स्टार्ट-अप के प्रस्ताव ही नहीं आए। एक तरफ सरकार स्किल इंडिया को बढ़ावा दे रही है और दूसरी तरफ अच्छी योजनाएं बजट के अभाव में दम तोड़ रही हैं।
बारह लाख की पहली किस्त का प्रस्ताव शासन को भेजा है। अब तक ग्रांट नहीं मिली है। ग्रांट मिलते ही सेंटर का काम शुरू करा दिया जाएगा।
- डीडी शर्मा, कोऑर्डिनेटर, इंक्यूबेशन सेंटर।